जीएसटी एक जुलाई से ही लागू,जीएसटी पर दृढ़ है मोदी सरकार



जब व्यापारिक संगठनों ने विरोध किया था, औद्योगिक संगठनों ने भी कहा था कि व्यापारियों की चिंताओं का निराकरण किया जाए, तब लगा था कि सरकार जीएसटी को शायद एक जुलाई से लागू नहीं करेगी। पहले वह व्यापारियों की चिंता दूर करेगी, फिर जीएसटी की दिशा में कोई कदम उठाएगी। इसकी वजह यह थी कि माना जाता है कि भाजपा का सबसे ज्यादा जनाधार व्यापारियों में ही है। लेकिन मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया है कि जीएसटी एक जुलाई से ही लागू होगा और वह भी 30 जून की रात संसद के केंद्रीय कक्ष में एक कार्यक्रम आयोजित करके, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत पक्ष-विपक्ष के कई नेतागण मौजूद रहेंगे। यानी, सरकार न सिर्फ जीएसटी लागू कर रही है, बल्कि वह यह भी सुनिश्चित कर रही है कि अगर यह कर-प्रणाली कड़वे अनुभव देने लगे तो विपक्ष की पार्टियां उसे कठघरे में खड़ा न कर पाएं। वैसे भी जीएसटी पर एक राजनीतिक आम सहमति तो पहले से ही है। तभी तो इसके लिए संसद में संविधान संशोधन हो पाया था। फिर, इसे लागू करने के तौर-तरीके बनाने के लिए गठित जीएसटी-परिषद में भी देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व है।

इसके बावजूद सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती, क्योंकि उसे पता है कि व्यापारियों की नाराजगी अभी दूर नहीं हुई। उनकी नाराजगी भी गलत नहीं है। अभी बड़े व्यापारियों को एक महीने में एक रिटर्न दाखिल करना पड़ता है, तो जीएसटी लागू होने के बाद दो करने पड़ेंगे। यह पूरा काम ऑनलाइन होना है और जाहिर है कि देश के छोटे-छोटे व्यापारी अभी तकनीक से दूर हैं। उनमें से बहुत से तो ऐसे भी होंगे, जिनकी आर्थिक स्थिति कंप्यूटर खरीदने व इंटरनेट लगवाने लायक भी नहीं होगी। यदि ये व्यापारी अपने लिए कुछ विशेष छूट मांग रहे हैं, खासकर समय पर रिटर्न दाखिल न करने की स्थिति में तय किए गए अर्थदंड में छूट, तो उनकी मांग गलत नहीं है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। यदि जीएसटी को लागू करने की तारीख को आगे बढ़ा दिया जाए, तब भी उसका विरोध होगा ही। ऐसी तारीख कभी नहीं आएगी, जब पूरा देश कहने लगे कि अब जीएसटी लागू कर दो, हम उसके लिए तैयार हैं।
हमेशा किसी न किसी के सामने कोई न कोई समस्या बनी ही रहेगी। तब सरकार ने जो रास्ता निकाला है, वही ठीक है कि पहले देश में जीएसटी लागू हो, फिर जो समस्याएं आएंगी, उनका समाधान खोजा जाएगा। गौरतलब यह भी है कि सरकार कानून से भी बंधी हुई है। जीएसटी के लिए किए गए 122वें संविधान संशोधन में प्रावधान है कि सितंबर-2017 तक देश में जीएसटी लागू हो जाना चाहिए, वरना यह संशोधन निष्प्रभावी हो जाएगा। अत: इसे अगर जुलाई में टाल दिया जाए तो पता नहीं, सितंबर तक वह लागू हो भी पाएगा या नहीं और तब सरकार को फिर जीएसटी की गिनती एक से शुरू करनी पड़ेगी। अत: उसने जोखिम ले लिया है। तय हो गया है कि अब एक जुलाई से जीएसटी लागू होना ही है।

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