महिलाओं को ढोंगी बाबाओं के पास जाने से खुद को रोकना होगा



धर्म एवं अध्यात्म की दुनिया के एक और तथाकथित ‘सौदागर’ गुरमीत सिंह के चेहरे से अब उसकी हकीकत का नकाब पूरी तरह से हट चुका है। वर्ष-2002 में अपने ही डेरे की साध्वियों के बलात्कार का आरोपी अब बलात्कार का सजायाफ्ता मुजरिम बन चुका है। सीबीआई अदालत ने उसे बीस वर्ष का सश्रम कारावास तथा तीस लाख रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। अब इस बलात्कारी, ढोंगी, अध्यात्मवादी गुरमीत सिंह को जेल भेजे जाने के बाद उसके आश्रम से संबंधित और भी अनेक ऐसे सनसनीखेज कारनामों की खबरें सुनाई दे रही हैं, जिन पर कानों को विश्वास ही नहीं हो रहा है। देश में स्वयं को विशिष्ट बताने वाले विभिन्न सम्मानित क्षेत्रों के कई लोग महिलाओं के साथ बलात्कार करने, बहला-फुसला कर हवस मिटाने, लालच देकर या सब्जबाग दिखाकर महिलाओं की अस्मत से खेलने का प्रयास करते रहे हैं। राह चलती लड़कियों का अपहरण करने और उनके साथ सामूहिक बलात्कार करने तथा बलात्कार के बाद हत्या कर देने जैसे मामले तो आए दिन सामने आते ही रहते हैं।
इससे पहले आसाराम नामक एक पाखंडी बाबा के साथ भी इसी प्रकार का मामला सुनाई दिया था। आज तक आसाराम तथा उसका पुत्र नारायण साईं जो कि संयुक्त रूप से अपने आश्रमों को खुद के लिए व्यभिचार, अय्याशी तथा बलात्कार का अड्डा बनाए हुए थे, आज भी जेल की हवा खा रहे हैं। आसाराम हो, उसका पुत्र नारायण साईं, दक्षिण भारत का पाखंडी संत नित्यानंद एवं दूसरे स्वयंभू संत आए दिन समाचार पत्रों में कुकर्मो की वजह से सुर्खियां बटोरते रहे हैं। सवाल यह है कि इस धर्म एवं अध्यात्म की दुनिया से जुड़े ऐसे लोगों के संपर्क में कोई स्त्री इतनी आसानी से कैसे आ जाती है कि वे उसकी अस्मत व आबरू को तार-तार कर दें? दरअसल, किसी महिला की इज्जत से खेलने के दोषी केवल पाखंडी अध्यात्मवादी लोग ही नहीं हैं बल्कि इस पूरे प्रकरण में वह परिवार खासतौर पर उस परिवार की महिलाएं भी बराबर की साझीदार हैं, जो ऐसे पाखंडी दुष्चरित्र बाबाओं के जाल में खुद तो फंसती हैं, अपने बच्चों को भी उसी नरक में धकेल देती हैं। अपने दैनिक कार्यो, रोजगार, व्यवसाय, नौकरी तथा परिश्रम में व्यस्त रहने वाले किसी पुरुष के पास इतना समय ही नहीं बचता कि वह किसी धर्म और अध्यात्म की रहस्यमयी दुनिया में जाकर अपना अधिक से अधिक समय बिता सके। परंतु प्राय: घर-गृहस्थी संभालने वाली महिलाएं बाबाओं, डेरों या अध्यात्म एवं धर्म की दुकानदारी चलाने वाले बाबाओं या ज्योतिषियों अथवा पुजारियों के चक्कर लगाती रहती हैं।
दरअसल, ऐसी महिलाओं को पूरा भरोसा होता है कि बाबा के आशीर्वाद से पति का काम और घर बेहतर तरीके से चल सकेगा। महिलाओं के इसी भरोसे का पाखंडी बाबा खूब फायदा उठाते हैं। पहले तो वे भय दिखाते हैं और बाद में शोषण। जहां तक डेरा सच्च सौदा का सवाल है, तो आश्रम से जुड़ने वाले अधिकांश परिवार तो इसी लालच से इससे जुड़े थे कि राम रहीम अपने भक्तों की शराब व नशे की लत छुड़वा देता है। यही पहचान पंजाब में राधा स्वामी नामक एक डेरे ने भी बनाई है। वहां भी भक्तों को शराब व नशे के सेवन के लिए मना किया जाता है। वास्तव में ऐसा देखा भी गया है कि इन डेरों से जुड़ने वाले अधिकांश ने नशीली चीजों के सेवन को त्याग दिया है। जाहिर है किसी पुरुष द्वारा नशे की आदत को छोड़ने के बाद परिवार में खुशहाली का वातावरण नजर आता है। खासतौर पर उसकी पत्नी जो अपने पति की नशे की लत से सबसे अधिक प्रभावित व पीड़ित होती है वह ऐसे आश्रमों के प्रमुखों की शुक्रगुजार हो जाती है और इसीलिए एक तरीके से अपने पूरे परिवार के साथ श्रद्धा व सम्मानपूर्वक अपने ‘गुरु’ के समक्ष अध्यात्मिक रूप से समपर्ण कर देती है। यहीं से गेंद उस बाबा या गुरुके पाले में चली जाती है। यदि सौभाग्यवश वह गुरु ईश्वर से डरता है और सच्चे रास्ते पर चलते हुए दूसरों को भी सही राह पर चलने की शिक्षा देता है तो निश्चित रूप से वह अपने भक्तों को भी न केवल सही राह दिखाएगा, बल्कि उनके मान-सम्मान व आबरू की रक्षा भी करेगा। यदि कोई व्यक्ति केवल गुरु, धर्मगुरु या किसी डेरे के गद्दीनशीन का चोला मात्र धारण किए हुए है और उसमें एक राक्षसी प्रवृत्ति पल रही है, तो ऐसे व्यक्ति के संपर्क में किसी परिवार के आने का अर्थ केवल अनर्थ ही समझा जाना चाहिए।
देश में महिला उत्पीड़न जैसे विषय को लेकर समाज में बहुत ही चिंताजनक स्थिति देखी जा रही है। न केवल जिम्मेदार लोगों बल्कि गुंडों-बदमाशों द्वारा सेक्स या बलात्कार की घटनाएं किसी न किसी बहाने अंजाम दी जाती हैं, बल्कि सर्वेक्षणों से यह भी पता चला है कि किसी भी लड़की को उसके युवावस्था में कदम रखते ही सबसे बड़ा खतरा उसके अपने परिवार के लोगों से ही रहता है। ऐसे में यदि आम लोग खासतौर पर महिलाएं यदि यह सोचें कि उनकी या बहू-बेटी की इज्जत किसी स्वयंभू धर्माधिकारी की संगत में सुरक्षित रह सकती है तो यह सबसे बड़ा धोखा है। इसलिए खुद के साथ परिवार की इज्जत बचाए रखने का जिम्मा महिलाओं पर ही है। इस युग में उनकी सजगता ही परिवार की इज्जत सुरक्षित रख सकती है।

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