दुष्कर्म की सख्त सजा जरूरी, आने वाले दिनों में सुरक्षित समाज की कल्पना साकार हो सकेगी




मध्यप्रदेश में अब बारह साल की आयु से कम की नाबालिग बालिकाओं से दुष्कर्म और किसी भी उम्र की महिला से सामूहिक दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड दिया जाएगा। हाल ही में दंड विधि संशोधन विधेयक को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। महिलाओं व नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ते अपराधों पर कार्रवाई के लिए सख्त कानून के मसौदे को मंजूरी देने वाला यह विधेयक मौजूदा विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। ऐसे में नाबालिग से रेप और गैंगरेप के आरोपी को मृत्युदंड की सजा देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा। इतना ही नहीं प्रलोभन देकर शारीरिक शोषण करने पर सजा के लिए 493क में संशोधन करके इसे भी अपराध बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
महिलाओं के खिलाफ आदतन अपराधी को धारा-110 के तहत गैर जमानती अपराध और जुर्माने की सजा देने के साथ महिलाओं का पीछा करने का अपराध दूसरी बार साबित होने पर कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा। बालिकाओं के साथ होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं पर अंकुश लगाने और दोषियों को सख्त सजा देने की बात पर जोर देते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने बैठक में यह विधेयक पारित किया है। हालिया बरसों में हर उम्र की महिलाओं के साथ छेड़छाड़, पीछा करने, शादी का झांसा देकर यौन शोषण और बर्बर सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। विकृत मानसिकता को परिलक्षित करने वाले ऐसे मामले सुर्खियां बन रहे हैं। अफसोसनाक ही है कि अब देश के हर हिस्से से मासूम बच्चियों के कामुक शोषण और दुष्कर्म की खबरें भी आए दिन सामने आने लगी हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट ब्रेकिंग द साइलेंस-चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज इन इंडिया के मुताबिक, हमारे यहां घरों से लेकर स्कूल तक बच्चों के साथ होने वाली यौनाचार की घटनाएं आम बात हैं। वहीं राष्ट्रीय आपराधिक ब्यूरो की रिपोर्ट की मानें तो देश में हर 22 मिनट के भीतर एक नया यौन हिंसा का मामला सामने आता है। यह हाल तब है जबकि देश में बिना रिपोर्ट के ही कई मामले दबा दिए जाते हैं। बावजूद इसके हमारे यहां बच्चों को कुकृत्यों से बचाने के लिए न तो कोई संजीदा है व न ही सरकार की नीतियां काफी हैं। आमतौर पर पुलिस प्रशासन भी ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाता नजर नहीं आता। समाज का नकारात्मक रवैया और कानूनी उलझनें, सब कुछ पीड़िता और उसके परिवारजनों के लिए ही परेशानी का सबब बनते हैं। अपराधी या बच निकलते हैं या मामूली सजा पाकर फिर ऐसे अपराधों को अंजाम देने के लिए समाज में खुले घूमते हैं।
ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब एक बार दुष्कर्म जैसा घिनौना अपराध करने के बाद नाममात्र की सजा पाकर अपराधी ने फिर ऐसा अपराध करने का दुस्साहस किया है। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला सराहनीय है। अब समाज में महिलाओं के प्रति आपराधिक प्रवृत्ति रखने वालों के बढ़ते दुस्साहस और नकारात्मक सोच के लिए सजा की सख्ती का संदेश जरूरी है। बलात्कार महिलाओं के साथ होने वाले जघन्य अपराधों में शामिल है। कम आयु की बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म के कई मामले तो अमानवीयता और बर्बरता की हद पार करने वाले हैं। ऐसे में कुत्सित सोच रखने वाले लोगों में कठोर सजा का भय होना बेहद जरूरी है। ऐसे में मध्यप्रदेश की सरकार द्वारा महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले में भी सख्त कानून बनाने की पहल अत्यंत सराहनीय कही जा सकती है।
छेड़खानी की घटनाओं के चलते लड़कियां गांवों से लेकर शहरों तक अब आए दिन इस शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना देने वाली समस्या का सामना करती हैं। विशेषकर कामकाजी महिलाओं और उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर निकलने वाली लड़कियों के लिए तो यह र्दुव्‍यवहार असुरक्षा का बड़ा कारण बन गया है। दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के साथ होने वाले ऐसे मामलों में बीते कुछ सालों में तीन गुना इजाफा हुआ है। छेड़छाड़ की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है, क्योंकि किसी बड़े अपराध की शुरुआत र्दुव्‍यवहार से होती है। दुखद है महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुंचाने व सामाजिक परिवेश को असुरक्षित बनाने के लिए जिम्मेदार विकृत मानसिकता वाले बिना किसी भय के सार्वजानिक स्थलों पर ऐसी हरकतें करते हैं।
हमारे यहां यौन हिंसा के बढ़ते आंकड़े डराने वाले हैं। घर, स्कूल, दफ्तर और यहां तक कि सड़क पर भी महिलाएं और बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। अब तो छोटी-छोटी बच्चियों के साथ भी रेप की घटनाएं हो रही हैं। नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाली ऐसी घटनाएं हर संवेदनशील इंसान के मस्तिष्क को झकझोरने और भयभीत करने वाली होती हैं। कैसी दुखद परिस्थितियां है कि ये मासूम उन इंसानों के ही विकृत व्यवहार का शिकार बनती हैं जिन पर इनकी सुरक्षा का जिम्मा होता है। कानूनी लचरता, महिला के परिवार के लिए समाज का असहयोगी रवैया और सख्त सजा मिलने का डर भी न होना, इन घटनाओं के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कारणों में से है। यही वजह है कि इन घटनाओं को संजीदगी से लिया जाना चाहिए और सभी दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए सख्त सजा दिया जाना जरूरी है।
गौरतलब है कि कई ऐसे देश हैं, जहां बलात्कार की सख्त सजा दी जाती है। चीन और मिस्र जैसे देशों में बलात्कारी को फांसी की सजा दिए जाने का प्रावधान है। अफगानिस्तान में भी इस अपराध के लिए कड़े कानून हैं। उत्तर कोरिया में भी अपराधियों के प्रति कोई दया या सहानुभूति नहीं दिखाई जाती। यहां रेप के लिए मुजरिम के सिर में एक के बाद एक गोलियां दागी जाती हैं। ग्रीस में रेप करने वाले को बेड़ियों में जानवरों की तरह बांधकर ताउम्र रखा जाता है। यह सजा सिर्फ रेप के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के खिलाफ छोटे से छोटे जुर्म के लिए भी दी जाती है। सऊदी अरब में भी इस जुर्म की मौत आसान नहीं है। रेप जैसा अपराध करने वाले को काफी पीड़ा और यातना से गुजरना पड़ता है, क्योंकि उसे तब तक पत्थर मारे जाते हैं, जब तक उसकी मौत न हो जाए।
दुष्कर्म कोई साधारण अपराध नहीं है। यह पीड़िता को हर तरह से पीड़ा पहुंचाता है। प्रतिष्ठा के हनन से लेकर मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक टूटन तक सब कुछ झेलना पड़ता है। कम उम्र में ऐसे हादसों की शिकार बनीं बच्चियां तो जीवन भर किसी पर भरोसा नहीं कर पातीं? ऐसी हैवानियत का शिकार बनने वाली बच्चियां मनोवैज्ञानिक रूप से इन हादसों की पीड़ा से खुद को जीवनभर नहीं उबार पातीं। समाज एक बड़ा वर्ग समय-समय पर यह मांग करता रहा है कि ऐसे मामलों को अंजाम देने वालों को कड़ी सजा देने का प्रावधान किया जाए। अब यूं भी यह आवश्यक है कि बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान का नैतिक दायित्व जिन लोगों को स्वयं समझ नहीं आता उन्हें कानून कठोरता से यह पाठ पढ़ाए। अब जबकि मध्यप्रदेश ने शुरुआत कर दी है, तो उम्मीद है कि बदलाव आएगा। मगर बदलाव तभी आएगा, जब समाज अपनी जिम्मेदारी समझेगा।

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