सोनिया गांधी ने पेश की मिसाल, इसे कांग्रेस में नए युग के रूप में भी देखा जा रहा है



कांग्रेस पार्टी की कमान बेटे राहुल गांधी को सौंपने के बाद अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को राजनीति से रिटायरमेंट का फैसला किया है। सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं। वह 19 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहीं। यह बदलाव देश की सबसे पुरानी पार्टी में नए युग का आगाज माना जा रहा है। 11 दिसंबर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निर्विरोध तरीके से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया था। इस शीर्ष पद के लिए केवल राहुल ने ही नामांकन किया था। शनिवार को राहुल कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाल सकते हैं। अब सोनिया गांधी ने ऐसे समय में रिटायरमेंट की घोषणा की है, जब कांग्रेस के सामने अपना जनाधार बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता के बाद से आधी सदी से अधिक समय तक देश पर शासन किया है, लेकिन भाजपा का कद बढ़ने के साथ ही देशभर की सियासत में कांग्रेस सिकुड़ती चली गई। एक समय पूरे देश पर कांग्रेस का नियंत्रण था, लेकिन वर्तमान में सिर्फ पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में उसकी सरकार है। नेहरू-गांधी परिवार के वंशज राहुल के सामने अब पार्टी की खोई हुई प्रतिष्ठा को लौटाने की चुनौती है।
सोनिया गांधी के नाम भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी की सबसे ज्यादा वक्त तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड है। कांग्रेस में राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से पहले यह सवाल उठ रहा था कि सोनिया गांधी की क्या भूमिका रहेगी? पार्टी नेता भी उन्हें मार्गदर्शक के रूप में देखने की उम्मीद लगाए थे, लेकिन अब सोनिया गांधी ने रिटायरमेंट लेकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। अगर सोनिया गांधी की राजनीतिक यात्र पर नजर डालें, तो उन्होंने 1997 में कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 1998 में कांग्रेस की वर्किग कमेटी ने उन्हें अध्यक्ष मनोनीत कर दिया, लेकिन राजनीति की राह इतनी आसान नहीं थी। 1999 में अटल सरकार गिरने के बाद सरकार बनाने की कोशिश की गई, लेकिन आखिरी समय में मुलायम सिंह यादव ने विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर सोनिया गांधी को समर्थन देने से इनकार कर दिया।
2004 में एनडीए का इंडिया शाइनिंग शबाब पर था। कांग्रेस को एक साथ रखने की चुनौती सोनिया गांधी पर थी। चुनाव नतीजों से सोनिया गांधी ने सबको चौंका दिया। 15 दलों के गठबंधन की सरकार बनी, जिसको वामंपथी दलों ने बाहर से समर्थन दिया। संसद के सेंट्रल हॉल में हंगामे के बीच सोनिया गांधी ने पीएम बनने से इनकार कर दिया। दिसंबर 2013 में जब सोनिया गांधी 66 साल की हुईं तो उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा कि वे सक्रिय राजनीति से 70 साल की उम्र तक रिटायर होने की योजना बना रही हैं। सोनिया का यह कहना चौंका देने वाला था। देखें तो भारत में शायद ही कोई है जो राजनीति से रिटायरमेंट लेता है। अब अगर सोनिया गांधी के बाद राहुल किसी और का साथ चाहते हैं, तो प्रियंका को ला सकते हैं। प्रियंका राहुल को मजबूती देने की भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस को सतर्क रहना होगा कि सत्ता के दो केंद्र न बनें।

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