Facebook Data Scandal: फेसबुक ने निजता पर की बड़ी चोट


Facebook Data Scandal: ब्रिटिश डेटा एनालिटिक्स फर्म ‘कैंब्रिज एनालिटिका’ पर पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा को चुराने एवं उसका प्रयोग ‘चुनाव प्रचार’ में करने का आरोप है। इस खुलासे के बाद फेसबुक भी सवालों के घेरे में आ गया है, क्योंकि यह निजता पर बड़ी चोट जो है।
आपका नाम, पता, सेक्स, पॉलिटिकल इंटरेस्ट और हर एक जानकारी फेसबुक पर मौजूद है। यानी आपकी सारी निजी जानकारी बिना किसी ‘आधार’ के ‘मार्क जकरबर्ग सरकार’ के पास है। ऐसे में प्राइवेसी की आजादी चाहने वाले इस दौर में आपका फेसबुक डेटा कहां तक सुरक्षित है? सिर्फ इसी सवाल पर पूरी दुनिया में बवाल मचा हुआ है। ब्रिटिश डेटा एनालिटिक्स फर्म ‘कैंब्रिज एनालिटिका’ ताजा विवाद की जड़ है। फर्म पर पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स के डेटा को चुराने और उसका इस्तेमाल ‘चुनाव प्रचार’ में करने का आरोप है। 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ये कंपनी डोनाल्ड ट्रंप को सेवा दे चुकी है।
यह खुलासा न्यूयॉर्क टाइम्स और लंदन ऑब्जर्वर की रिपोर्ट में किया गया है। जाहिर है इस खुलासे के बाद किसी के भी मन में सवाल उठ रहे होंगे। मसलन-कैंब्रिज एनालिटिका ने क्या कांड किया है? फेसबुक कैसे जिम्मेदार है? अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन क्या कह रहे हैं? भारत को यानी हमें इसमें दिलचस्पी क्यों लेनी चाहिए? और क्या फेसबुक किसी भी दूसरे देश या प्रशासन से ताकतवर हो चुका है। इन सभी सवालों का जवाब हर कोई अपने तरीके से तलाशने में जुटा है। लेकिन अभी तो सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक विवादों में घिर गया है। उस पर आरोप हैं कि फर्म ने मतदाताओं की राय को मैनिप्युलेट करने के लिए यूजर्स के डेटा में सेंध लगाई।
अब ट्रंप का चुनावी कैंपेन संभाल चुकी कैंब्रिज एनालिटिका का भारत के चुनावों के साथ भी कनेक्शन सामने आ रहा है। इसकी वेबसाइट पर जानकारी दी गई है कि 2010 के बिहार चुनाव में इसे कॉन्ट्रैक्ट मिला था और कुल टारगेट सीटों में से 90 फीसदी से अधिक पर इसके क्लाइंट को भारी जीत हुई थी। अब इसके भी चर्चे हैं कि यह फर्म भारत में 2019 के आम चुनावों के लिए भी राजनीतिक दलों के संपर्क में है। यानी केवल अमेरिका ही नहीं, भारत समेत दुनिया के चुनाव इस नई तरह के बिग डेटा ऐनालिसिस से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पांच करोड़ यूजर्स के निजी डेटा की इस चोरी में फेसबुक की भूमिका को भी संदेह के दायरे में ला दिया है। आरोप लग रहे हैं कि फेसबुक ने इस चोरी को होने दिया।
बिग डेटा चोरी की यह घटना 2015 में हुई लेकिन फेसबुक ने इस मामले में चुप्पी अब तोड़ी जब पिछले हफ्ते इसका खुलासा हुआ। अब फेसबुक ने माना है कि डेटा में सेंधमारी हुई, लेकिन अब भी फेसबुक अपने यूजर्स पर ही जिम्मेदारी डालता दिख रहा है। फेसबुक के डेप्युटी जनरल काउंसल पॉल ग्रेवल ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि फर्म ने उन यूजर्स की जानकारी ली जिन्होंने एप में साइनअप किया और उन्हें अपनी मंजूरी दी। फेसबुक पर सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि टेक्नोलॉजी कंपनियां अक्सर अपने यूजर्स के बीच डेटा चोरी की खबरें सार्वजनिक करती रहती हैं लेकिन दो सालों के दौरान फेसबुक ने एक बार भी अपनी यह जिम्मेदारी नहीं समझी।

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