चीन से निपटने बेहतर रणनीति


राजएक्सप्रेस, भोपाल। Doklam Issue: भारत (India) ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती हुई है। सेना की यह रणनीति चीन की तरफ से आने वाले किसी भी खतरे से निपटने की है। उम्मीद है कि चीन चुप बैठेगा।
भारत (India) अब 1962 का हिंदुस्तान नहीं रह गया है, जब चीन की सीमा पर उसकी डिफेंस लाइन कमजोर थी। तब सुदूर चौकियों पर नाममात्र सैनिक तैनात थे और फॉरवर्ड पोस्ट्स से को-ऑर्डिनेशन भी कमजोर था। अब यह बीते दौर की बात लगती है और चीन से लगती लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक की वास्तविक सीमा रेखा पर भारतीय सेना पूरी तरह से मुस्तैद नजर आती है। सिक्किम-भूटान और तिब्बत के बीच स्थित डोकलाम पठार पर चीन और भारत के सैनिक 73 दिनों तक डटे रहे थे।
अब इस मसले का पटाक्षेप हो चुका है, लेकिन भारतीय सेना अब भी पूरी मुस्तैदी से तैनात है। भारत ने पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस और होवित्जर मिसाइलों की तैनाती हुई है। सेना की यह रणनीति चीन की तरफ से आने वाले किसी भी खतरे से निपटने की है। 2017 में चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने 426 बार भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी। इसके इतर चीन कई बार अपनी सामरिक ताकत का दिखावा कर भारत को आंख दिखाता रहता है।
साम्यवादी शासन के तहत चीन का यह रिकॉर्ड रहा है कि वह किसी मोर्चे पर कदम तभी पीछे हटाता है जब उसके दिमाग में किसी नए मोर्चे पर पलटवार की मंशा छिपी हो। डोकलाम में भारत की कूटनीति के आगे मात खा चुका चीन इसी ताक में है कि वह कैसे भारत पर फिर से दबाव बना सके। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के लिए यह पचाना मुश्किल हो रहा है, कि भारत को उकसाने की तमाम कोशिशें करने के बाद वे अपने मकसद में नाकाम रहे, और आखिर में चीन को समझौते के लिए मजबूर होना पड़ा।
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय नेताओं और राजनयिकों के दौरे का विरोध करना हो या फिर डोकलाम में 10 किलोमीटर तक सड़क बना लेना, सब कुछ तय रणनीति के हिसाब से कर रहा है। चीन की इसी मंशा को ध्वस्त करने के लिए अब भारत ने सीमा पर अपनी सामरिक ताकत बढ़ाई है। सेना के ताजा कदम को दूसरे रूप में भी देखा जा सकता है। जब भारत सीमा पर पहले से ही चीनी सेना की लगातार घुसपैठ की कोशिशों से जूझ रहा है, तब हिमालयी क्षेत्र के लिए चौकस निगरानी ही शांति की कुंजी होगी।
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी सचेत कर चुके हैं कि भारत संतुष्ट होकर नहीं बैठ सकता, क्योंकि भविष्य में डोकलाम जैसी घुसपैठ के और कई मामले सामने आ सकते हैं। भारत के साथ लंबी विवादित सीमा पर अपनी आक्रामकता को जहां चीन जायज ठहराता है वहीं भारत का रवैया अब तक प्रतिक्रिया वाला ही बना हुआ था। अब जब सेना ने अपने सैनिकों की संख्या और घातक हथियारों की तैनाती कर दी है, तो उम्मीद है कि चीन अपनी जद में रहेगा। अब भारत को चाहिए कि वह दूसरे मोर्चो पर भी सामरिक ताकत में इजाफा करे, ताकि चीन के साथी भी आवाज न निकाल सकें।

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