बाबाओं ने डिगाई आस्था


राजएक्सप्रेस, भोपाल। गुरमीत राम रहीम और आसाराम को सजा होने के बाद संदेश यही गया था कि अब धर्म और आस्था के नाम पर कोई भी बाबा छल-कपट करने से बचेगा, मगर ऐसा हुआ नहीं। ताजा मामला दाती महाराज (Dati Maharaj)से जुड़ा है। उन पर आश्रम की एक लड़की ने बलात्कार का आरोप लगाया है। संभव है कि उन पर लगे आरोप गलत साबित हो जाएं और वे बरी हो जाएं, मगर अभी जो आस्था संदेह के घेरे में आई है, उसका क्या किया जाए? अब इस दिशा में सोचना बेहद जरूरी हो गया है।
हाल में शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज पर राजस्थान की एक 25 वर्षीय युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। युवती ने बाबा के तीन सौतेले भाइयों पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि यह सभी मेरे सिवाय कई लड़कियों से वर्षो से दुष्कर्म कर रहे थे। इससे पहले आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम के अलावा ऐसे कई प्रचलित नाम है जिन पर इस तरह के आरोप लग चुके है। अब सवाल यह उठता है जिन पर भक्त आंख मूंद कर भरोसा करते हैं और भगवान से जुड़ने का किसी धर्मगुरु के रूप में एक सुगम माध्यम ढूंढते हैं, वे भक्त अब क्या किसी और पर भरोसा दिखा पाएंगे। बाबाओं के प्रति एक तरह से नकारात्मक लहर चल पड़ी है, जिस वजह से सही व धर्म के प्रति इमानदार गुरुओं को लेकर भी अब लोगों का मन विचलित सा होने लगा है। यह हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि ऐसे फर्जी बाबाओं पर लोगों द्वारा चढ़ावे के माध्यम से करोड़ो-अरबों की संपत्ति का निर्माण हो जाता है, जिसका दुरुपयोग कर वे अपने प्रचार-प्रसार को इतना बढ़ावा दे देते हैं कि भोली जनता उनके झांसे में आ जाती है। लोगों को फंसाने के लिए इनके पास पूरा गैंग होता है इस बात की पुष्टि कानून के शिकंजे में आए कई बाबाओं ने की है।
गुरमीत राम रहीम के पास अस्पताल, बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और गैस स्टेशन के अलावा देश के कई राज्यों मे आश्रम है। इसकी कुल संपत्ति 300 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। वहीं सालों से लोगों से खिलवाड़ करने वाले आसाराम बापू के पास सब कुछ मिलाकार 413 करोड़ की संपत्ति है, तो निर्मल बाबा भी 238 करोड़ का मालिक है। यह संपत्ति केवल तीन बाबाओं की है, जबकि हमारे आसपास ऐसे सैकड़ों बाबा हैं। इन आंकड़ों को बताने का उद्देश्य सिर्फ यही है कि इन लोगों के पास इतनी दौलत जमा है कि उससे विकास के नए आयाम गढ़े जा सकते हैं। क्या कभी सोचा है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कैसे जमा हो जाता है। श्रद्धालु या भक्त जो भी चढ़ावा चढ़ाते हैं यह लोग उस पैसे को अपने अन्य व्यापार में लगा देते है। चूंकि, चंदे पर कोई टैक्स नहीं है, इसीलिए यह लोग उसका फायदा उठाते हैं व अपने अन्य काम
भी उसकी आड़ में करते रहते हैं।

देश में अब तक जितने भी करोड़पति बाबा सामने आए हैं, अगर उनका इतिहास देखा जाए, तो पता चलेगा कि वह एक सामान्य आदमी था। लेकिन कुछ ही वर्षो मे करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा। ऐसे बाबाओं पर पहले तो सिर्फ आर्थिक तौर पर कमजोर व अशिक्षित लोग ही विश्वास करते थे लेकिन अब हर तरह के लोगों ने इन पर विश्वास करना शुरू कर दिया है। फिर भेड़चाल से तो हमारा पुराना वास्ता है ही, बस एक आदमी कुछ अलग सा कर ले फिर तो पीछे भीड़ अपने आप खड़ी नजर आती है। हद तो तब हो जाती है जब लोग अपने बच्चों को ऐसे धूर्तो के पास छोड़ देते हैं। शिक्षा व दीक्षा के नाम पर कई बाबाओं ने न जाने कितनी मासूम लड़कियों की इज्जत लूट कर उनकी जिंदगी बर्बाद की। कुछ बच्चियों ने साहस करके इनकी पोल पट्टी खोल दी लेकिन अब भी न जाने कितनी अपनी आत्माओं व अहसास को मार कर जी रही है। किसी अंजान को हम 100 रुपए देने पर भी कई बार सोचते है लेकिन कुछ भक्त इन बाबाओं में ऐसा क्या देख लेते है जिससे वे अपनी जिंदगी की सबसे खूबसूरत चीज उनके हवाले कर देते हैं। क्या किसी भी इंसान के पास औलाद के अलावा दूसरी कोई बेशकीमती चीज हो सकती है। निश्चित तौर पर नहीं लेकिन फिर भी हम ऐसा बहुत सरलता से कर लेते हैं जिसके कई उदाहरण हमारे पास हैं। आखिर हम ऐसा इन बाबाओं के पास क्या ढूंढते हैं जो हमें मंदिर जाकर या स्वयं पूजा-पाठ करके नहीं मिलता। धार्मिक ज्ञान और धर्म से जुड़ी अहम बातों के लिए मंदिर या फिर किसी भी धार्मिक स्थल में धर्मगुरु होते हैं। हमें वहां से सही एवं सटीक जानकारी प्राप्त हो सकती है तो हमें धर्म के फर्जी ठेकेदारों के पास जाने की क्या जरूरत।
लगातार हो रही है ऐसी घटनाओं से अब सबक लेने का सही अवसर है। अपनी मेहनत की कमाई का एक रुपया भी कहीं गलत जगह नहीं देना चाहिए और न ही बिना जांच-पड़ताल के अपने बच्चों को किसी भी आश्रम में छोडना चाहिए। इस तरह के मुद्दों में हमें गंभीरता दिखानी होगी। इन घटनाओं से यह तो तय हो जाता है कि ऐसे लोग कभी भी भगवान व हमारे बीच कोई माध्यम नहीं बन सकते हैं। कुल मिलाकर आस्था खतरे में है और समाज चिंता में कि आखिर भरोसा किस पर करें। हमारी धार्मिक आस्थाएं बहुत मजबूत हैं। उसी आस्था के प्रभाव के बल पर युगों-युगों से हमारा देश दुनिया भर में महान और विश्वगुरु के रूप में माना गया है, लेकिन पिछले कुछ समय से धर्म के नाम पर धार्मिक आस्था का गलत फायदा उठाने वाले जिस तेजी से कानून के दायरे में आते जा रहे हैं, उससे हमारी आस्था का आधार ही डगमगाने लगा है। साधु संतों को हमारे समाज में भगवान के दूत में रूप में सम्मान देने की परंपरा रही हैं, लेकिन जब पता चलता है कि साधु के वेश में हमारी आस्था के साथ छल हो रहा है, तो फिर पूरी धर्म व्यवस्था से ही समाज का मन उठ जाता है। आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है।
अगर ऐसे लोगों की लिस्ट देखें, तो दाती महाराज के बाद राम रहीम, आसाराम बापू, रामपाल महाराज, राधे मां और स्वामी नित्यानंद जैसे लाखों और करोड़ों की संख्या के अनुयायियों वाले साधु आज कानून के शिकंजे में हैं, उन पर भयानक, संगीन और शर्मनाक आरोप हैं। हो सकता है इनमें से कई कल निर्दोष और निष्कलंक भी छूट जाएं, लेकिन आज तो सच्चाई यही है कि ऐसे लोगों की वजह से हमारी आस्था खतरे में है। समाज का संकट यह है कि जिनके प्रति हमारी आस्था रही है, वे ही जब हमसे छल कर रहे हैं, तो हम भरोसा किस पर करें। हमारा समाज धर्म को हमेशा अपने से ऊपर मानता है, उसे श्रेष्ठता का सम्मान देता है, इसीलिए धार्मिक नेताओं और धर्म गुरुओं की बात को स्वीकारता है। निर्देशों का अनुसरण करता है। उनकी मान्यताओं को पालता है, लेकिन संभवतया इसी की आड़ में कुछ लोग धोखे से धर्म के ठेकेदार बन कर समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि आस्था के आवरण में धर्म के जरिये धोखा देने का धंधा इतनी तेजी से धमक पड़ा है कि समझ ही नहीं आता किस पर समाज भरोसा करें और किस पर नहीं।
सवाल यह भी है कि हमारी धार्मिक आस्थाओं के साथ इसी तरह से छल होना जारी रहा और उसके परिणाम स्वरूप ईश्वरीय शक्ति की ओर ले जाने वाली संत संस्था से ही समाज का भरोसा डगमगा गया, तो समाज को धर्म की राह कौन दिखाएगा। हमारा समाज धर्म के प्रति हमारी आस्था पर ही टिका है। आस्था की वजह से ही हमें विश्वास की प्राप्ति होती है, लेकिन छल जब आस्था के साथ ही होने लगे, कपट जब श्रद्धा के साथ ही किया जा रहा हो, तो धर्म पर विश्वास कैसे बचेगा और हमारी आने वाली पीढ़ियों को हमारी सभ्यता और संस्कृति के प्रति श्रद्धा कैसे पैदा होगी।

योगेश कुमार सोनी (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

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