अब स्मार्टफोन कर रहा है बीमार


राजएक्सप्रेस, भोपाल। शुरू में मोबाइल फोन (Smartphone)सिर्फ फोन था, लेकिन अब यह इतना स्मार्ट हो चुका है कि हम पूरी दुनिया मुट्ठी में लेकर चलने लगे हैं। मगर इसका दूसरा खतरनाक पहलू भी है, खासतौर से बच्चों और नौजवानों के लिए मोबाइल ने एक घातक लत का रूप ले लिया है।
देश के बीस केंद्रीय विश्वविद्यालयों में किए गए इस अध्ययन का निचोड़ यह है कि जिस तेजी से स्मार्टफोन (Smartphone) पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, वह स्वास्थ्य और पढ़ाई के लिहाज से एक खतरनाक संकेत है। शुरू में मोबाइल फोन सिर्फ फोन था, लेकिन अब यह इतना स्मार्ट हो चुका है कि हम पूरी दुनिया मुट्ठी में लेकर चलने लगे हैं। पर इसका दूसरा पहलू भी है, खासतौर से बच्चों और नौजवानों के लिए मोबाइल ने एक लत का रूप ले लिया है। छात्रों और बच्चों के संदर्भ में जो तथ्य आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। हाल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के एक साझा अध्ययन में पता चला कि कालेज-छात्र एक दिन में डेढ़ सौ से ज्यादा बार अपना स्मार्टफोन देखते हैं। 23 फीसद छात्रों का कहना था कि वे रोजाना आठ घंटे से ज्यादा मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं। 63 फीसद छात्र-छात्राओं ने चार से सात घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करने की बात कही।
ये आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल हमारी जिंदगी पर इस कदर हावी हो चुका है कि हम सचेत भाव से उसका इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि मोबाइल ही हमें संचालित करने लगा है। हालांकि आज सूचना और पठन सामग्री का सबसे बड़ा स्रोत स्मार्टफोन ही है, ऐसे में इसका इस्तेमाल अपरिहार्य हो गया है। इसलिए सवाल उठता है कि जब हमारी जिंदगी मोबाइल पर निर्भर हो चुकी है और हम यह भी जान रहे हैं कि इसका अति इस्तेमाल खतरे की ओर धकेल रहा है, तो फिर बचा कैसे जाए इस स्थिति से? कैसे तालमेल बिठाया जाए मोबाइल के इस्तेमाल और जीवन चर्या में, ताकि यह किसी भी रूप में घातक साबित न हो। आज सूचनाओं और डाटा का जमाना है। इसलिए इसमें कोई दो राय नहीं कि मोबाइल हर लिहाज से एक सशक्त और उपयोगी गैजेट के रूप में अपनी जगह बना चुका है। 80 फीसद छात्रों के पास अपने मोबाइल फोन हैं और वे इनका इस्तेमाल इंटरनेट और एप डाउनलोड करने जैसी सुविधाओं के लिए करते हैं। आज दुनिया में सोशल मीडिया का इस्तेमाल बिना स्मार्टफोन के संभव ही नहीं है।
लेकिन सदुपयोग से इतर, इसका स्याह पक्ष भी है। यह है मोबाइल का दुरुपयोग। बच्चे, किशोर और नौजवान होती पीढ़ी इसके खतरों से लगता है अनजान है। स्मार्टफोन की लत ने बच्चों का बचपन छीन लिया है और वे परिवार से कट कर मोबाइल की दुनिया में जीने लगे हैं। मोबाइल पर पोर्न और गेम इनके मनोरंजन के सबसे बड़े साधन हैं। हालात इतने गंभीर होते जा रहे हैं कि अगर बच्चे से मोबाइल ले लिया जाए तो वह क्या कर बैठेगा, कोई नहीं जानता। सड़कों पर चलते वक्त, गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल का इस्तेमाल रोजाना ही हादसों का सबब बन रहा है। सेल्फी के शौक ने न जाने कितनी जिंदगियां छीन लीं। बड़ी चुनौती है कि स्मार्टफोन का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल तो हो, पर उसकी लत से बचा जाए।

Comments

Popular posts from this blog

एक कलाकार की स्मृति का बिकना

भारत भले ही10 सबसे असुरक्षित देशों की सूची में शामिल न हो, लेकिन देश में सुरक्षित माहौल बड़ी चुनौती

बुराड़ी की घटना के मायने बेहद गंभीर