पहली परीक्षा में पास हो गए योगी, जनता ने सरकार के काम पर मुहर लगा दी




उत्तरप्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ही नहीं, विपक्ष के लिए भी नवंबर इम्तिहान का महीना था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पास हुए हैं। उत्तरप्रदेश में हुए निकाय चुनाव में योगी सरकार की नीति व नीयत पर शहरी मतदाताओं के समर्थन की मुहर लगी है। वहीं विपक्ष को भी इस चुनाव के बहाने अपनी ताकत को आंकने और परखने का मौका मिला है। खासकर कांग्रेस और सपा को। मेयर पद पर सपा कुछ खास नहीं कर पाई, तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। खुद अमेठी का किला भी इस बार ध्वस्त हुआ है। अमेठी की दो नगर पालिका सीटें गौरीगंज और जायस हाथ से निकल गई हंै। बसपा के लिए निकाय चुनाव जरूर खास रहा। विधानसभा चुनाव में शिकस्त झेलने के बाद पार्टी ने कई जगहों पर भाजपा को कड़ी टक्कर दी, तो दो जगह मेयर जिताने में कामयाब भी रही। निकाय चुनाव योगी आदित्यनाथ के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं थे। यह पहले ही कहा जा रहा था कि यूपी निकाय चुनाव के नतीजे कुछ भी हों। भले ही इस चुनाव में भाजपा हारे या फिर जीते, लेकिन नतीजे योगी आदित्यनाथ के लिए बेहद अहम होंगे।
योगी भी निकाय चुनाव को हल्के में नहीं ले रहे थे। खुद योगी ने चुनाव प्रचार की कमान संभाले रखी। योगी जानते थे कि विधानसभा चुनाव ठीक नोटबंदी के बाद हुए थे और जनता ने भी नोटबंदी के विरोध में मतदान नहीं किया और भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती। इस बार जब निकाय चुनाव हो रहे हैं, तब जीएसटी का भूत सामने होगा। मगर अब जीएसटी की बाधा भी पार हो गई है। यूपी निकाय चुनाव का परिणाम भाजपा के लिए गुजरात में संजीवनी का काम करेगा। पार्टी इस जीत को गुजरात में जरूर भुनाएगी। लेकिन उसका प्रदर्शन बेहतर नहीं हुआ, तो मोदी की चमक में आई गिरावट का शायद पहला सबसे बड़ा संकेत होगा। यही वजह है कि भाजपा और सीएम योगी ने निकाय चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी थी। यह निकाय चुनाव कई मायनों में योगी और भाजपा के लिए खास रहा है। बेहतर परिणाम आने के बाद योगी के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने बंद हो जाएंगे।
निकाय चुनाव को 2019 में लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा था, अब जबकि भाजपा बेहतर कर चुकी है, तो भविष्य की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाती है, क्योंकि निकाय चुनाव को मिनी जनमत संग्रह माना जाता है। प्रदेश की 16 नगर निगमों में सबसे खास जीत अयोध्या से आई है। यहां पहली बार हुए मेयर के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई है। अयोध्या ही वह सीट है, जहां से योगी को पहली जीत की खबर मिली। सुब्रमण्यम स्वामी ने इस जीत को मंदिर लहर का नतीजा बताया है। इस समय मंदिर को लेकर अयोध्या का मिजाज वैसे ही गर्म है। अब जबकि अयोध्या ने भाजपा को जीत का तोहफा दे दिया है, तो बदले में वह भी कुछ न कुछ चाहेगी। योगी भी यह जानते हैं कि अयोध्या वासियों को क्या चाहिए। खैर, योगी की परीक्षा हो गई है। निकाय चुनाव की जीत उन्हें मजबूती देगी और वे खुलकर काम कर सकेंगे।

Comments

Popular posts from this blog

हर एक दिल में है, इस ईद की खुशी

पर्यावरण: पंच तत्वों में संतुलन बनाए रखने की चेतना पंचतत्व का भैरव नर्तन

भारत भले ही10 सबसे असुरक्षित देशों की सूची में शामिल न हो, लेकिन देश में सुरक्षित माहौल बड़ी चुनौती