GDP ने दिए शुभ संकेत, यह अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के दबाव से मुक्त हो चुकी



नवंबर-2017 में दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिए थे। अब तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है। यह आंकड़े बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के दबाव से मुक्त हो चुकी है।
वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में जीडीपी विकास दर 5.7 फीसदी थी। यह गिरावट देश में एक जुलाई से जीएसटी लागू करने से पहले आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती के कारण दर्ज हुई। इसके बाद नवंबर में आए जीडीपी की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 6.3 फीसदी हो गई। दूसरी तिमाही के ये आंकड़े सरकार के लिए राहत लाए, क्योंकि पहली तिमाही में विकास दर के आंकड़े 13 तिमाही के निचले स्तर पर थे। यह गिरावट देश में आर्थिक सुधारों की दिशा में बढ़ते कदमों के कारण आंकी गई।
लिहाजा दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट का 6 फीसदी के ऊपर जाना और एक फिर तीसरी तिमाही में ग्रोथ रेट का सात फीसदी का आंकड़ा पार कर लेना बता रहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में केंद्र सरकार को अनुमान से बेहतर आर्थिक ग्रोथ मिलने की उम्मीद है। ग्रोथ के आंकड़े साफ दिखा रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे दिनों की शुरुआत हो रही है। यह आंकड़े इसलिए भी आर्थिक सुस्ती से बाहर निकलने का साफ संकेत है, क्योंकि पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही यानी जनवरी-मार्च, 2017 में नोटबंदी का दवाब रहा और जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था को दूसरा झटका लगा।
लिहाजा, अब इसका सात फीसदी के ऊपर जाना साफ बता रहा है कि देश में आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं। देश में निजी क्षेत्र की ग्रोथ समझने के लिए रियल जीवीए का आंकड़ा देखना भी अहम है। यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था में कुल उत्पाद और सेवाओं के ग्रोथ को दर्शाता है और अर्थव्यवस्था के वास्तविक स्वास्थ्य को दर्शाता है, क्योंकि इसमें केंद्र सरकार द्वारा रक्षा समेत अन्य सेवाओं के खर्च का ब्यौरा नहीं रहता। जहां सितंबर तिमाही में यह आंकड़ा 6.3 फीसदी था, वहीं दिसंबर तिमाही में यह बढ़कर 6.6 फीसदी पर है तो साफ दिखा रहा है कि अर्थव्यवस्था में आई रफ्तार में रियल जीवीए का योगदान है और अर्थव्यवस्था बगैर सरकारी खर्च के सहयोग से आगे बढ़ रही है।
निर्माण सेक्टर में 6.8 फीसदी की दर्ज हुई ग्रोथ बेहद अहम है, क्योंकि देश में सबसे ज्यादा नौकरी पैदा करने के लिए यह क्षेत्र तैयार है। वहीं दूसरा अहम क्षेत्र कृषि है, जिसमें 4.1 फीसदी की तेज ग्रोथ देखने को मिली है। लिहाजा, जीडीपी के आए आंकड़ों से साफ है कि देश में नई नौकरियों के लिए अहम दोनों क्षेत्र निर्माण और कृषि उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में अच्छी रफ्तार देखने को मिलेगी।

जीडीपी के आंकड़ों पर एक अन्य सवाल पूछा जा सकता है, क्या भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश की स्थिति सुधर रही है, क्योंकि लंबी अवधि तक तेज रफ्तार सिर्फ और सिर्फ निजी व सरकारी क्षेत्रों में लगातार निवेश से ही संभव है। बहरहाल, जीडीपी के नए आंकड़ों में आई उछाल से साफ है कि देश में बड़े निवेश का रास्ता साफ हो रहा है और आने वाली तिमाहियों में यह आंकड़ा अधिक रफ्तार दर्ज कर सकता है।

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