अवसर मिलने में गोरे रंग की भूमिका, लेकिन अब इस जटिल समस्या से बाहर आना जरूरत बन गई
अमेरिका-यूरोप में एक समय में रंग भेद अपने चरम पर था। वहां अफ्रीकी देशों से काले रंग के लोगों को गुलामी करने के लिए लाया जाता था। उन्हें तरह-तरह की प्रताड़नाएं दी जाती थीं, पशुओं की तरह मारा-पीटा जाता और बाकायदा बाजार में खड़ा कर के नीलाम किया जाता था, लेकिन अब सैद्धांतिक तौर पर वहां से रंग भेद लगभग खत्म हो चुका है। यह भी माना जाता है कि भारत में रंग भेद है ही नहीं, लेकिन यह बात सच नहीं है। वास्तविकता तो यह है कि हमारे समाज में हमेशा से रंग भेद रहा है और यह भेद अब भी कायम है, पर हम और हमारा समाज इस सच को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जबकि विज्ञापन की दुनिया से लेकर सिनेमा, सियासत, मॉडलिंग के क्षेत्र में काबिलियत के बजाय गोरे रंग को अब भी अत्याधिक महत्व दिया जाता है। विज्ञापन की दुनिया में चाहे प्रिंट हो या फिर टीवी दोनों में गोरी महिलाओं को ही प्रमुखता दी जाती है। आपको अभिनेत्री यामी गौतम का विज्ञापन तो याद ही होगा, जिसमें वह मात्र कुछ ही दिनों में क्रीम से गोरा होने की बात कहती हैं। वहीं यह विज्ञापन भी उनके जैसे गोरे रंग वाली अभिनेत्री से ही कराया जाता है, लेकिन चर्चा केव...

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