बच्चों को हिंसा से बचाना जरूरी
राज एक्सप्रेस, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक 2016 में ही देश भर में एक लाख बच्चे यौन अपराधों (Child Voilence)के शिकार हुए। यह आंकड़ा वर्ष 2015 के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा है। बच्चों के प्रति हिंसा को रोकने के लिए कानूनी सख्ती के साथ सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। उम्मीद की जाती है कि कोई भी समाज सभ्य होने के साथ-साथ अपने बीच के उन तबकों के जीवन की स्थितियां सहज और सुरक्षित बनाने के लिए तमाम इंतजाम करेगा, जो कई वजहों से जोखिम या असुरक्षा के बीच जीते हैं। लेकिन 21वीं सदी का सफर करते हमारे बच्चे अगर कई तरह के खतरों से जूझ रहे हैं तो निश्चित रूप से यह चिंताजनक है और हमारी विकास-नीतियों पर सवाल उठाता है। बच्चों के खिलाफ अपराध लंबे समय से सामाजिक चिंता का विषय रहे हैं, लेकिन तमाम अध्ययनों में इन अपराधों का ग्राफ बढ़ने के बावजूद इस दिशा में कुछ ऐसा नहीं किया जा सका है, जिससे हालात में सुधार हो। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2015 के मुकाबले 2016 में बच्चों के प्रति अपराध के मामलों में 11 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इनमें भी कुल अपराधों ...