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भाजपा की चुनौती कांग्रेस को मिले जैकपॉट से निपटना

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पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले से पूरा देश हैरान है। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन को देश का सबसे बड़ा घोटाला बताया गया था, लेकिन सभी आरोपी बच गए। राजनीतिक तौर पर खलबली मचाने वाले इस मामले में कॉरपोरेट व राजनेता सभी आरोपियों को सीबीआई अदालत ने बरी कर दिया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल सीबीआई अदालत ने इस घोटाले से जुड़े सभी मामलों में फैसला सुनाया। इनमें से दो मामलों में जांच सीबीआई ने और तीसरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय ने की। इस मामले में मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी थे। सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि सरकारी पक्ष आरोपियों पर दोष सिद्ध करने में नाकाम रहा। इस फैसले के बाद कांग्रेस के हाथ भाजपा और प्रधानमंत्री को घेरने के साथ ही आगामी लोकसभा चुनावों के लिए एक मनचाहा जैकपॉट हाथ लग गया है। यह फैसला भाजपा के लिए सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने जैसा है, क्योंकि गुजरात में 99 के फेर में पड़ने के बाद अभी वह संभल भी नहीं पाई है कि कांग्रेस को हमलावर होने का हथियार मिल गया है। अदालत के फैसले का असर आगामी दिनों में होने वाले चुनाव पर...

सोनिया गांधी ने पेश की मिसाल, इसे कांग्रेस में नए युग के रूप में भी देखा जा रहा है

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कांग्रेस पार्टी की कमान बेटे राहुल गांधी को सौंपने के बाद अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को राजनीति से रिटायरमेंट का फैसला किया है। सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं। वह 19 साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहीं। यह बदलाव देश की सबसे पुरानी पार्टी में नए युग का आगाज माना जा रहा है। 11 दिसंबर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निर्विरोध तरीके से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया था। इस शीर्ष पद के लिए केवल राहुल ने ही नामांकन किया था। शनिवार को राहुल कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कार्यभार संभाल सकते हैं। अब सोनिया गांधी ने ऐसे समय में रिटायरमेंट की घोषणा की है, जब कांग्रेस के सामने अपना जनाधार बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता के बाद से आधी सदी से अधिक समय तक देश पर शासन किया है, लेकिन भाजपा का कद बढ़ने के साथ ही देशभर की सियासत में कांग्रेस सिकुड़ती चली गई। एक समय पूरे देश पर कांग्रेस का नियंत्रण था, लेकिन वर्तमान में सिर्फ पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में उसकी सरकार है। नेहरू-गांधी परिवार के वंशज राहुल के सामने अब पार्टी की...

मणिशंकर अय्यर को बाहर कर कांग्रेस ने उम्दा काम किया, दिखाया दूसरों को रास्ता

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राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले पार्टी जिस पुराने चोले को उतार फेंकने की ओर बढ़ रही है, वह अच्छे दिनों की ओर लौटने का संकेत है। गुजरात चुनाव के दौरान पार्टी के नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए असंसदीय भाषा का प्रयोग न करने की नसीहत देने से लेकर मणिशंकर अय्यर को पार्टी से बाहर करने तक का फैसला इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि गुरुवार को अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए बेहद निचले स्तर की बयानबाजी करते हुए कहा था कि ‘इस आदमी में कोई सभ्यता नहीं है और ऐसे मौके पर इस किस्म की गंदी राजनीति करने की क्या आवश्यकता है?’ इस बयान के आने के बाद भाजपा और खुद मोदी ने कांग्रेस को घेरने में कसर बाकी नहीं रखी। मगर रात होते तक राहुल सक्रिय हुए और न सिर्फ अय्यर को माफी मांगनी पड़ी, बल्कि उन्हें बाहर का रास्ता भी देखना पड़ा। इस पूरे एपिसोड में लोगों ने कांग्रेस को खलनायक से नायक बनते भी देखा और इस बात पर भी बहस शुरू हुई कि अगर पार्टी नेतृत्व सख्ती से पेश आए, तो फिर राजनीति में भाषा के गिरते स्तर को बचाया जा सकता है। राजनीति में भाषा में आ रही गिरावट के प्रति च...

अब राहुल गांधी अगले माह कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएंगे, आसान नहीं राहुल की राह

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कांग्रेस के भीतर इंतजार की घड़ी खत्म होने की ओर है। अब यह पूरी तरह तय हो चुका है कि अगले माह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी हो जाएगी। अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए एक दिसंबर को अधिसूचना जारी होगी। इसके लिए 4 दिसंबर को नामांकन होगा और 16 दिसंबर को मतदान होगा। अगर मतदान हुआ तो 19 दिसंबर को मतगणना होगी और इसी दिन नाम का ऐलान भी कर दिया जाएगा। वैसे माना जा रहा है कि राहुल गांधी सर्वसम्मति से कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाएंगे। इसकी वजह यह है कि सभी दिग्गज नेता लंबे समय से उनको अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में कोई अन्य नेता नामांकन दाखिल करेगा, इसकी संभावना बेहद कम है। अध्यक्ष पद पर ताजपोशी के लिए चुनाव प्रक्रिया राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप ही हो रही है। दरअसल, वे चाहते हैं कि अध्यक्ष पद पर उनकी ताजपोशी महज सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव के आधार पर ही न कर दी जाए। राहुल संगठन चुनाव की प्रक्रिया के तहत ही अध्यक्ष पद पर अपनी ताजपोशी चाहते हैं। जनवरी-2013 में राहुल गांधी को महासचिव से पार्टी उपाध्यक्ष बनाकर नंबर दो की भूमिका सौंप दी गई थी। उसके एक साल ब...

गुजरात चुनाव को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी जीत हार के कयास लगने शुरू

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राजनीति अपनी जगह है, उसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं अपनी जगह, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। गुजरात के भावी चुनावों को लेकर जिस तरह सोशल मीडिया पर आक्रामक चर्चाएं जारी हैं, उससे आसानी से यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां इस बार कयास आसान नहीं है। जिस तरह चुनाव आयोग ने पहले हिमाचल प्रदेश की तारीखों का ऐलान कर दिया और गुजरात की तारीखों को रोके रखा, उससे भी इसी आशंका को बल मिला है। लेकिन अपने चुनावी सर्वेक्षणों की साख के लिए विख्यात सीएसडीएस के संजय कुमार के मुताबिक, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सीएसडीएस के सर्वेक्षण नतीजों के मुताबिक अगर गुजरात के लोगों की सोच मौजूदा स्तर पर बनी रही तो निश्चित तौर पर एक बार फिर गुजरात में भाजपा की सरकार बनेगी। भारत जैसे देश में राजनीति में नतीजों का सही-सही अनुमान लगा पाना किसी के लिए संभव नहीं है। लेकिन यह भी हकीकत है कि चुनाव नतीजों का मोटा अनुमान उस क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे नेताओं को लग जाता है। आपसी बातचीत में कांग्रेसी नेता यह स्वीकार कर रहे हैं कि पिछली बार के नतीजों की तुलना में इस बार अगर उन्होंने दस-पंद्रह सीटें भी ज्यादा जीत लीं तो उसे ...