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मुखर्जी का कार्यकाल याद करने योग्य, राष्ट्रपतियों के लिए मिसाल बनेंगे प्रणबदा

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आगामी 24 जुलाई को प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति भवन में अंतिम दिन होगा। लेकिन बतौर राष्ट्रपति उनका कार्यकाल याद किए जाने योग्य है। उनकी सक्रियता, देश के कई समसामयिक मुद्दों पर गंभीर टिप्पणियां व अहम मसलों पर उनके अप्रत्याशित निर्णय लोगों के जेहन में हमेशा बरकरार रहेंगे। भारत में राष्ट्रपतियों का कार्यकाल प्राय: इत-उत के व्याख्यानों, गणतंत्र दिवस समारोह समेत कुछेक सांकेतिक चीजों तक ही केंद्रित रहता है, लेकिन प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल काफी सक्रियता-पूर्ण रहा है। 25 जुलाई-2012 को प्रणबदा ने भारत के तेरहवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी, जो अब अंतिम पड़ाव पर है। वैसे भी उनका राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना अचानक ही हुआ था। संभव है कि कांग्रेस नेतृत्व के दिमाग में किसी प्रकार की पूर्व-योजना रही हो, मगर जनसामान्य के लिए तो यह बेहद ही चौंकाने वाला निर्णय था। कारण कि तब प्रणब मुखर्जी वित्तमंत्री के रूप में राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय थे और कांग्रेस के अंदरखाने में ऐसी चर्चा होने लगी थी कि उन्हें साल-2014 के लोकसभा के चुनावों में प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया जा सकता है। यह मांग तार्क...

बेहतर राष्ट्रपति कार्यकाल में सिद्ध हुए, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

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राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बहुत सारी बातें हो रही हैं, जातीय कार्ड से लेकर कौन हारेगा एवं कौन जीतेगा तक कीं। राष्ट्रपति पद के दोनों प्रत्याशी प्रचार भी कर रहे हैं। वे सांसदों से मिल रहे हैं और राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों का सामना कर रहे हैं। यह सब चुनाव तक चलता रहेगा व इसी पर चर्चा भी होती रहेगी। इसके बीच कुछ चर्चा वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की भी हो, ताकि पता चले कि उनका कार्यकाल कैसा रहा है। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने में कितना योगदान दिया, कितना नहीं। बहरहाल, जुलाई में ही राष्ट्रपति भवन से विदा लेने वाले प्रणब मुखर्जी को संविधान विशेषज्ञ और उसमें आस्था रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है एवं विगत पांच वर्षो में देश के राष्ट्रपति होने के नाते उन्होंने उसका संरक्षण भी किया है। भारत के संविधान और कांग्रेस के संविधान से उनका परिचय अद्भुत है। प्रणबदा वैसे व्यक्ति हैं, जिनसे संविधान के किसी भी प्रावधान या अस्पष्ट क्षेत्रों के बारे में स्पष्ट जानकारी के लिए संपर्क किया जा सकता है। उनकी विद्वता और उनके ज्ञान का कोई सानी नहीं है। भारत जब से गणतंत्र बना, तब ...