मणिशंकर अय्यर को बाहर कर कांग्रेस ने उम्दा काम किया, दिखाया दूसरों को रास्ता
राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले पार्टी जिस पुराने चोले को उतार फेंकने की ओर बढ़ रही है, वह अच्छे दिनों की ओर लौटने का संकेत है। गुजरात चुनाव के दौरान पार्टी के नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए असंसदीय भाषा का प्रयोग न करने की नसीहत देने से लेकर मणिशंकर अय्यर को पार्टी से बाहर करने तक का फैसला इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि गुरुवार को अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए बेहद निचले स्तर की बयानबाजी करते हुए कहा था कि ‘इस आदमी में कोई सभ्यता नहीं है और ऐसे मौके पर इस किस्म की गंदी राजनीति करने की क्या आवश्यकता है?’ इस बयान के आने के बाद भाजपा और खुद मोदी ने कांग्रेस को घेरने में कसर बाकी नहीं रखी। मगर रात होते तक राहुल सक्रिय हुए और न सिर्फ अय्यर को माफी मांगनी पड़ी, बल्कि उन्हें बाहर का रास्ता भी देखना पड़ा। इस पूरे एपिसोड में लोगों ने कांग्रेस को खलनायक से नायक बनते भी देखा और इस बात पर भी बहस शुरू हुई कि अगर पार्टी नेतृत्व सख्ती से पेश आए, तो फिर राजनीति में भाषा के गिरते स्तर को बचाया जा सकता है। राजनीति में भाषा में आ रही गिरावट के प्रति च...