नया साल काफी उथल-पुथल मचाने वाला होगा, रोचक होगी 2018 की राजनीति
साल-2017 का अंत जिस राजनीतिक घटनाक्रम से हुआ है उसके असर से साल-2018 की राजनीति कतई अछूती नहीं रह सकती। आखिर 2018 के राजनीतिक घटनाओं की नींव तो वर्ष-2017 ही बनेगा। तो 2017 ने क्या संकेत दिया है? जिन दो प्रमुख राजनीतिक घटनाओं से साल 2017 का अंत हुआ है वे हैं, गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश में भाजपा की विजय एवं कांग्रेस की पराजय। 2017 की शुरुआत में भी हमने देखा था कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पंजाब को छोड़ दें तो कांग्रेस को कहीं सफलता नहीं मिली। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड की जीत ने भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ाया वहीं विपक्ष को हताशा में डुबा दिया। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में केवल सात सीटों तक सिमट गई। यानी प्रदेश से उसका लगभग सफाया हो गया। प्रदेश की एक बड़ी खिलाड़ी बसपा 19 सीटों पर सिमटी। अपने बहुमत की बदौलत प्रदेश पर राज करने वाली पार्टी की ऐसी दशा वास्तव में उसका सफाया हो जाना ही है। सपा अपनी स्थापना काल से सबसे कम सीटों पर आ गई है। कहने का तात्पर्य यह कि 2017 ने विपक्ष के खेमे में निराशा तथा भाजपा में उम्मीद और उत्साह का ही संचार किया है। यहां तक कि जिस बिहार में भाजपा सत्ता ...