पूंजीगत व्यय पर टिका है विकास, सरकार की सोच सही विकास की रफ्तार तेज होगी
चालू वित्त वर्ष की दो तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट आने के बाद विकास को लेकर सरकार की चिंता स्वाभाविक है। फिलहाल, अर्थव्यवस्था में छाई मंदी दृष्टिगोचर हो रही है। इस स्थिति पर काबू पाने के लिए सरकार सार्वजनिक खर्च को बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस वजह से राजकोषीय घाटे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। फिर भी केंद्र सरकार इस राह पर चलने के लिए तैयार है, क्योंकि मौजूदा समय में पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी करके विकास के विविध मानकों में तेजी लाई जा सकती है। उदाहरण के तौर पर सड़क एवं आवास क्षेत्र में निवेश करने पर सीमेंट, छड़ और रेत आदि की मांग में इजाफा एवं रोजगार सृजन में बढ़ोतरी हो सकती है। मौजूदा समय में औद्योगिक गतिविधियों, बुनियादी क्षेत्र और रोजगार के अवसरों में सुस्ती का माहौल बना है। उत्पादों की मांग में सुस्ती एवं खर्च करने में परहेज से विकास का गुलाबीपन मद्दिम पड़ रहा है। माना यह जा रहा है कि पूंजीगत व्यय में वृद्धि होने से अर्थव्यवस्था में सुधार आ सकता है। अस्तु केंद्र वित्त मंत्री अरुण जेटली, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, रेलवे एवं कोयला मंत्री...