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पहला धर्म इंसानियत

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एक राजा प्रतिदिन रात में यह देखने के लिए घूमते थे कि कहीं कोई अधिकारी प्रजा को सता तो नहीं रहा, कोई दुखी तो नहीं है या कोई लुटेरा तो नहीं घूम रहा है। ऐसे ही एक रात को घूमते हुए वे नदी किनारे जा पहुंचे। उन्होंने देखा कि वहां एक युवक लेटा हुआ है। राजा ने पास जाकर पूछा- तुम कौन हो। युवक एक अजनबी को इतनी रात गए घोड़े पर देख सहम गया। फिर बोला-मैं लक्ष्मी का दामाद हूं। अपनी पत्नी को लेने जा रहा हूं, पर मुझे इतना जोर का बुखार चढ़ गया है कि मैं एक कदम भी नहीं चल सकता। रातभर यहां आराम कर लूं, तो सबेरे चलने लायक हो जाऊंगा। राजा ने उसके माथे पर हाथ रखा तो वाकई वह तप रहा था। राजा ने कहा-जाड़े के दिन हैं, यहां अकेले में रहना ठीक नहीं। तुम मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें पहुंचा देता हूं। राजा भेष बदले हुए थे, सो युवक उन्हें पहचान नहीं सका। वह थोड़ा हिचकिचाया, पर राजा ने उसे बड़े प्रेम से उठाकर बैठाया और बोले- तुम बीमार हो, घोड़े पर बैठ जाओ। मैं घोड़े की लगाम पकड़े चलता हूं। सहारा देकर उन्होंने युवक को घोड़े पर बैठा दिया। राजा ने रास्ते में मालूम कर लिया कि युवक राजमहल में काम करने वाली लक्ष्मी का दाम...