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त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति गिराने के बाद भाजपा को निशाना बनाकर दूसरे राज्यों में भी प्रतिमाओं को खंडित करने का सिलसिला जारी

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Lenin:-  त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति गिराने के बाद भाजपा को निशाना बनाकर दूसरे राज्यों में भी महापुरुषों की प्रतिमाओं को खंडित किए जाने का सिलसिला जारी है। मगर भारतीय जनता पार्टी पर लाख आरोप लगाए जा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि जब लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई, तब त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं थी। तब माणिक सरकार की ही अगुआई में कार्यवाहक सरकार काम कर रही थी। त्रिपुरा में जनादेश आते ही पच्चीस साल के वामपंथी शासन के प्रतीकों पर हमला शुरू हो गया। लेनिन की मूर्ति तोड़ दी गई। इसे लेकर बौद्धिक वर्ग के एक तबके ने सवालों की फेहरिश्त उछालनी शुरू कर दी है। इस घटना की प्रतिक्रियाएं भी हुईं। कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया तो मेरठ में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबडेकर की मूर्ति तोड़ी गई तो सुदूर दक्षिण तमिलनाडु में पेरियार की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया गया। जाहिर है कि इसे लेकर देश में बवाल मचा। इसे लेकर सवाल उठने भी चाहिए, लोकतांत्रिक समाज में सत्ता का दर्शन और चेहरा बदलते ही उसके प्रतीकों को सदा के लिए आखिर क्यों उखाड़ फेंक देना चाहिए। हाला...

GDP ने दिए शुभ संकेत, यह अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के दबाव से मुक्त हो चुकी

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नवंबर-2017 में दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिए थे। अब तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है। यह आंकड़े बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के दबाव से मुक्त हो चुकी है। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में जीडीपी विकास दर 5.7 फीसदी थी। यह गिरावट देश में एक जुलाई से जीएसटी लागू करने से पहले आर्थिक गतिविधियों में आई सुस्ती के कारण दर्ज हुई। इसके बाद नवंबर में आए जीडीपी की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 6.3 फीसदी हो गई। दूसरी तिमाही के ये आंकड़े सरकार के लिए राहत लाए, क्योंकि पहली तिमाही में विकास दर के आंकड़े 13 तिमाही के निचले स्तर पर थे। यह गिरावट देश में आर्थिक सुधारों की दिशा में बढ़ते कदमों के कारण आंकी गई। लिहाजा दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट का 6 फीसदी के ऊपर जाना और एक फिर तीसरी तिमाही में ग्रोथ रेट का सात फीसदी का आंकड़ा पार कर लेना बता रहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में केंद्र सरकार को अनुमान से बेहतर आर्थिक ग्रोथ मिलने की उम्मीद है। ग्रोथ के आंकड़े साफ दिखा र...

नेताओं का इस तरह से अंधविश्वास में फंसना देश और समाज के लिए सही नहीं, भूत-प्रेत की बातें बंद करें

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बिहार में लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव के बाद अब राजस्थान विधानसभा में भी अंधविश्वास की बातें होने लगी हैं। नेताओं का इस तरह से अंधविश्वास में फंसना देश और समाज के लिए सही नहीं है। अत: वे इस तरह की बातें बंद कर विकास पर ध्यान लगाएं। हमारे नेताओं के बारे में अकसर कहा जाता है कि वे हर काम से पहले शुभ-अशुभ का विचार जरूर कर लेते हैं। ऐसा करके नेता शायद राजनीति में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचना चाहते हैं। शुभ मुहूर्त में नामांकन दाखिल करने से शपथ लेने तक अकसर नेताओं की बातें दिख जाती हैं, जो उन्हें अंधविश्वास में यकीन रखने वाला बनाती हैं। इन दिनों अंधविश्वास का जीता-जागता उदाहरण बिहार में देखने को मिल रहा है। जहां लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भूत पीछे लगाने का दावा कर रहे हैं। भूतों के डर से तेज ने अपना सरकारी आवास भी छोड़ दिया है। अंधविश्वास का दूसरा उदाहरण राजस्थान में देखने को मिला। सदन के बाहर मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर और नागौर से भाजपा विधायक हबीबुर्रहमान अशरफी ने यहां तक कहा कि विधानसभा में बुरी आत्माओं का साया है। तभी तो आज तक सदन में कभ...

प्रेम के नाम पर देश में बढ़ते अपराध, ऐसे में अगर हिंसा अपना स्थान बना रही, तो उसे प्यार शब्द देना गलत होगा

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प्रेम में असफल होने के बाद महिलाओं के साथ होने वाला अपराध अब चिंता नहीं बढ़ाता, बल्कि हमारी सोच और संस्कृति पर सवाल उठाता है। हर साल की तरह इस साल भी वैलेंटाइन डे के मौके पर कई जगह हिंसक गतिविधियां अंजाम दी गईं। सवाल यह है कि प्रेम के नाम पर ऐसा कोई कैसे कर सकता है, क्योंकि जहां प्रेम होता है, वहां हिंसा नहीं होती। ऐसे में अगर हिंसा अपना स्थान बना रही है, तो उसे प्यार शब्द देना गलत होगा। राजस्थान की राजधानी जयपुर में वैलेंटाइन डे के मौके पर एक सरफिरे ने महिला के साथ खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। खुद को प्रेमी मानने वाले विकृत मानसिकता वाले इस व्यक्ति ने मॉल में महिला पर तेजाब से हमला कर दिया। दो बार पहले ही तलाक ले चुका यह व्यक्ति महिला पर शादी के लिए दवाब डाल रहा था। उसकी बात न मानने और महिला के निकाह के लिए मना करने पर उसने तेजाब से हमला कर दिया। दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले मॉल में इस दर्दनाक हादसे को अंजाम देने वाला व्यक्ति महिला को काफी समय से प्रताड़ित कर रहा था। हिंसक हुए प्रेम की ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के हापुड़ भी आई है, जहां भाग कर शादी करने से इनकार करने पर एक सिरफिरे ...

बेटियों के बिना अधूरा है संसार, समाज में बेटियों के अस्तित्व को स्वीकारें व उन्हें पूरा सम्मान भी दें

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देश में कानूनी तौर पर लिंग परीक्षण भले ही प्रतिबंधित है, लेकिन इसे प्रतिबंधित किए जाने के मायने तब तक अधूरे रहेंगे, जब तक प्रशासन, कानून और माता-पिता खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे। कानून के बावजूद लिंगानुपात में बेटियां घट रही हैं। एक ओर बेटे के सानिध्य, संपर्क और संबल से वंचित होते बूढ़े मां-बाप के अश्रुपूर्ण अनुभव और भारतीय आंकड़े मातृत्व और पितृत्व के लिए खुद में एक नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। सभी देख रहे हैं कि बेटियां दूर हों, तो भी मां-बाप के कष्ट की खबर मिलते ही दौड़ी चली आती हैं, बिना कोई नफे-नुकसान का गणित लगाए, बावजूद इसके भारत ही नहीं, दुनिया में बेटियां घट रही हैं। काली बनकर दुष्टों का संहार करने वाली अब बेटी बनकर पिता के गुस्से का शिकार बन रही है। देश के 21 बड़े राज्यों में से 17 राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है। गुजरात में गिरावट 53 अंक नीचे पहुंच गई है। नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में भ्रूण का लिंग परीक्षण कराकर होने वाले गर्भपात के मामले में जांच की जरूरत पर जोर दिया गया है। गुजरात के बाद हरियाणा का स्थान है। यहां 35 प्वॉइंट्स की...

राजनीति में दागियों पर अंकुश लगाना जरूरी, लेकिन आज तक एक भी दल ने इस दिशा में गंभीरता से प्रयास नहीं किया

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सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार दिए नेताओं के पार्टी प्रमुख बनने को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा, यह चिंता का विषय है कि दोषी करार दिया गया व्यक्ति खुद चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है। ऐसा शख्स किसी राजनीतिक दल का प्रमुख है और वह चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन कर रहा है। बहुत संभव है कि चुने हुए उम्मीदवारों में से कुछ जीतकर सरकार में भी शामिल हो जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि अगर कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि कानून के तहत चुनाव नहीं लड़ सकता तो वह कोई भी राजनीतिक पार्टी कैसे बना सकता है? कोर्ट की यह टिप्पणी उस फैसले के बाद आई है, जिसमें बीते दिनों केंद्र सरकार को सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन का निर्देश दिया था। दागी नेताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सटीक है। अब सरकार और चुनाव आयोग को इस दिशा में सोचना होगा एवं राजनीति से अपराधीकरण को खत्म करना होगा। बता दें कि ओम प्रकाश चौटाला और लालू यादव जैसे नेता दोषी करार दिए गए हैं, लेकिन फिर भी पार्टी के सर्वेसर्वा बने हैं। हालांकि, चुना...

अवसर मिलने में गोरे रंग की भूमिका, लेकिन अब इस जटिल समस्या से बाहर आना जरूरत बन गई

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अमेरिका-यूरोप में एक समय में रंग भेद अपने चरम पर था। वहां अफ्रीकी देशों से काले रंग के लोगों को गुलामी करने के लिए लाया जाता था। उन्हें तरह-तरह की प्रताड़नाएं दी जाती थीं, पशुओं की तरह मारा-पीटा जाता और बाकायदा बाजार में खड़ा कर के नीलाम किया जाता था, लेकिन अब सैद्धांतिक तौर पर वहां से रंग भेद लगभग खत्म हो चुका है। यह भी माना जाता है कि भारत में रंग भेद है ही नहीं, लेकिन यह बात सच नहीं है। वास्तविकता तो यह है कि हमारे समाज में हमेशा से रंग भेद रहा है और यह भेद अब भी कायम है, पर हम और हमारा समाज इस सच को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जबकि विज्ञापन की दुनिया से लेकर सिनेमा, सियासत, मॉडलिंग के क्षेत्र में काबिलियत के बजाय गोरे रंग को अब भी अत्याधिक महत्व दिया जाता है। विज्ञापन की दुनिया में चाहे प्रिंट हो या फिर टीवी दोनों में गोरी महिलाओं को ही प्रमुखता दी जाती है। आपको अभिनेत्री यामी गौतम का विज्ञापन तो याद ही होगा, जिसमें वह मात्र कुछ ही दिनों में क्रीम से गोरा होने की बात कहती हैं। वहीं यह विज्ञापन भी उनके जैसे गोरे रंग वाली अभिनेत्री से ही कराया जाता है, लेकिन चर्चा केव...

ब्रिटेन में अकेलापन मंत्रालय बनाया गया, दुख-तकलीफ बांटने व अवसाद से लड़ने की लोगों के लिए सार्थक पहल की

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हाल ही में ब्रिटेन में अकेलापन मंत्रालय बनाया गया। खुद अकेलेपन का दंश झेल चुकीं ट्रेसी क्राउच बागडोर संभालने वाली पहली मंत्री बनी हैं। यानी ब्रिटिश सरकार द्वारा एक मंत्रालय गठित कर आमजन के दुख-तकलीफ बांटने और अवसाद से लड़ रहे लोगों के लिए सहयोगी वातावरण बनाने की सार्थक पहल की गई है। दरअसल, ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने के बाद से ही वहां अकेलापन चर्चा का विषय बना हुआ था। कुछ समय पहले आई एक रिपोर्ट ने यह बात पुख्ता की तो अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए ब्रिटेन की पीएम टरीजा मे ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया। गौरतलब है कि वर्ष 2017 की कमीशन ऑन लोनलिनैस की रिसर्च के मुताबिक, ब्रिटेन में 90 लाख से ज्यादा लोग सबसे ज्यादा या हमेशा अकेलापन महसूस करते हैं। रिसर्च में यह भी सामने आया कि लगभग दो लाख बुजुर्गो ने महीने भर से भी ज्यादा वक्त से किसी दोस्त या करीबी से बात नहीं की। ध्यान देने वाली बात यही थी कि ऐसा अक्सर होता रहता है, जिसका नतीजा कई गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अकेलापन लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालता है। यह एक दिन में 15 सिगरेट पी...

बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया, बेहतरी के साथ ही महंगाई की आहट

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अपने चौथे व आखिरी पूर्णकालिक बजट से पहले पेश आर्थिक समीक्षा में केंद्र सरकार ने जीएसटी के असर और कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी के बाबत महंगाई बढ़ने की तरफ इशारा किया है। सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 का आर्थिक सर्वे संसद में पेश किया। इस आर्थिक सर्वे में जीएसटी के असर से लेकर भारतीयों में लड़के की चाहत से जुड़े 10 नए आर्थिक तथ्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। समीक्षा में सरकार ने माना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया है। इसके नए आंकड़े उभर कर सामने आए हैं। अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। नई कर प्रणाली अपनाने से प्रमुख उत्पादक राज्यों के कर संग्रह में कमी आने की आशंका भी निराधार साबित हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब राज्यों के बीच जीएसटी आधार के वितरण को उनकी अर्थव्यवस्थाओं के आकार से जोड़ दिया गया है। इसी तरह नवंबर 2016 यानी नोटबंदी से लेकर अब तक व्यक्तिगत आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 18 लाख की वृद्धि दर्ज की गई है। इस समीक्षा रिपोर्ट में नोटबंदी का जिक्र कहीं नहीं है। ऐसे में यह ...

मप्र सरकार रेप पीड़िता को बंदूक का लाइसेंस देगी। यह फैसला महिलाओं को सुरक्षित बनाने की दिशा में उम्दा कदम

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मध्य प्रदेश में रेप पीड़िता को पद्मावती सम्मान और रेपिस्ट को फांसी की सजा के प्रावधान को विधानसभा में मंजूरी के बाद राज्य सरकार एक और फैसला लेने जा रही है। सरकार रेप पीड़िताओं को बंदूक का लाइसेंस देने की तैयारी में है। इस कदम के पीछे महिला-बाल विकास विभाग की मंत्री अर्चना चिटनीस का तर्क है कि अब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर इंतजाम करना जरूरी है। जो भी इसकी पात्र होंगी, उन्हें लाइसेंस दिया जाएगा, लेकिन प्राथमिकता तो दुष्कर्म पीड़िताओं को ही दी जाएगी। महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है और यह काम अगर मध्यप्रदेश में हो रहा है, तो इसे सार्थक रूप में ही देखा जाना चाहिए। वैसे, मध्यप्रदेश में महिलाओं में हथियारों का लाइसेंस लेने का चलन काफी पुराना है। सिर्फ इंदौर में ही बीते दो वर्षो में 18 महिलाओं को बंदूक का लाइसेंस दिया जा चुका है। बढ़ते अपराध के बीच खुद को सुरक्षित रखने के लिए महिलाओं की संख्या भले ही पुरुषों के मुकाबले कम हो, मगर यह कदम महिलाओं की सोच के प्रति नया बदलाव परिलक्षित करता है। नई पहल हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ...

गुजरात चुनाव को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी जीत हार के कयास लगने शुरू

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राजनीति अपनी जगह है, उसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं अपनी जगह, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। गुजरात के भावी चुनावों को लेकर जिस तरह सोशल मीडिया पर आक्रामक चर्चाएं जारी हैं, उससे आसानी से यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां इस बार कयास आसान नहीं है। जिस तरह चुनाव आयोग ने पहले हिमाचल प्रदेश की तारीखों का ऐलान कर दिया और गुजरात की तारीखों को रोके रखा, उससे भी इसी आशंका को बल मिला है। लेकिन अपने चुनावी सर्वेक्षणों की साख के लिए विख्यात सीएसडीएस के संजय कुमार के मुताबिक, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सीएसडीएस के सर्वेक्षण नतीजों के मुताबिक अगर गुजरात के लोगों की सोच मौजूदा स्तर पर बनी रही तो निश्चित तौर पर एक बार फिर गुजरात में भाजपा की सरकार बनेगी। भारत जैसे देश में राजनीति में नतीजों का सही-सही अनुमान लगा पाना किसी के लिए संभव नहीं है। लेकिन यह भी हकीकत है कि चुनाव नतीजों का मोटा अनुमान उस क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे नेताओं को लग जाता है। आपसी बातचीत में कांग्रेसी नेता यह स्वीकार कर रहे हैं कि पिछली बार के नतीजों की तुलना में इस बार अगर उन्होंने दस-पंद्रह सीटें भी ज्यादा जीत लीं तो उसे ...

संघ व राज्य के बीच सहयोग की बेहतर पहल

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देश में बदलाव के लिए नीति आयोग के संचालन परिषद की गत दिनों तीसरी बैठक हुई। इस बैठक से पूर्व आयोग की दो बैठकें वर्ष-2015 में फरवरी और जुलाई माह में हुई थीं। इस बैठक में पूर्व की दोनों बैठकों में लिए गए निर्णयों की समीक्षा की गई और यह देखा गया कि उन निर्णयों पर कहां तक प्रगति हुई है। गौर करें, तो पहली बैठक में लिए गए निर्णयों में प्रमुख था कि संघ और राज्यों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाया जाएगा। बहरहाल, ताजा बैठक में देश में बदलाव लाने के लिए सात वर्षो के रणनीतिक ब्योरे समेत तीन वर्षो की पूरी कार्ययोजना को प्रस्तुत किया गया। गौरतलब है कि बीते एक अप्रैल को सरकार ने पंचवर्षीय योजना को समाप्त कर दिया था। अब इसकी जगह तीन वर्षीय योजना लाई गई है। इसे थोड़ा और अच्छे से समझें, तो यह योजनाओं की त्रिस्तरीय व्यवस्था है। पंद्रह वर्षो की समग्र कार्ययोजना, सात वर्षो की रणनीति और तीन वर्षो की लघु अवधि योजना। इन तीनों प्रकार की कार्य योजनाओं के पीछे प्रधानमंत्री मोदी के न्यू इंडिया के नारे को धरातल पर साकार करने की मंशा दिखाई देती है। बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा-‘मैं ...