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एक कलाकार की स्मृति का बिकना

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हिंदी सिनेमा के महान शोमैन राज कपूर की सुनहरी स्मृतियों से जुड़ा आरके स्टूडियो (RK Studio)अब बिकने जा रहा है। हिंदी सिनेमा की अनेक क्लासिक फिल्मों का गवाह रहे आरके स्टूडियो का बिकना कलाप्रेमियों के लिए बड़े झटके के समान है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कपूर परिवार अपने फैसले से पीछे हटेगा। वैसे, महाराष्ट्र सरकार इस स्टूडियो का अधिग्रहण कर राजकपूर की अनमोल यादों को बचाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकती है। हिंदी सिनेमा के महान शोमैन राज कपूर की सुनहरी स्मृतियों से जुड़ा आरके स्टूडियो अब बिकने जा रहा है। हिंदी सिनेमा की अनेक क्लासिक फिल्मों का गवाह एवं आदर्श रहे आरके स्टूडियो का बिकना कलाप्रेमियों के मन को भा नहीं रहा है। पर इसके बिकने की खबर कोई अफवाह न होकर एक हकीकत है। दरअसल राजकपूर के मंझले पुत्र और मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर ने स्वयं यह जानकारी देते हुए कहा है कि ‘हमारे पिता का सपना अब परिवार के लिए सफेद हाथी बन गया है। इससे हमारी यादें जरूर जुड़ी है, लेकिन परिवार में झगड़े का कारण बने, इससे पहले ही हमने इसे बेचने का फैसला ले लिया है।’ यह स्टूडियो मुंबई के चेंबूर इलाके में दो एकड़ में फैला हुआ …

अब खत्म हो लोकपाल का इंतजार

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राज एक्सप्रेस भोपाल। लोकपाल (Lokpal Bill)की नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को समयबद्ध प्रगति की जानकारी 10 दिन के भीतर शपथ-पत्र के जरिए देने को कहा है। लोकपाल की नियुक्ति का रास्ता साफ  कर न्यायालय ने लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में बड़ा काम किया है। अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जो काम चार साल से अटका पड़ा है, उसे पूरा करे और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की जो मंशा है, उसे भी पूरा करे। लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को समयबद्ध प्रगति की जानकारी 10 दिन के भीतर शपथ-पत्र के जरिए देने को कहा है। दरअसल साढ़े चार साल पहले लोकपाल कानून बन जाने के बावजूद भी लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। नियुक्ति न हो पाने की पृष्ठभूमि में वर्तमान लोकसभा में विपक्ष के नेता के नहीं होने का तर्क सरकार अदालत को दे रही है। लोकपाल नियुक्ति की जो प्रक्रिया है, उसमें विपक्ष के नेता को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया जाना है। दरअसल 2014 के आम चुनाव के बाद लोकसभा का जो गणित बना है, उसमें किसी भी दल के पास विपक्षी दल की हैसियत नहीं है। विपक्षी दल नहीं है, इसलि…

अब विवाद छोड़ें एलजी व सीएम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने दिल्ली के बॉस पर फैसला सुनाते हुए केजरीवाल और एलजी (LG Vs Delhi Government)दोनों को उनके अधिकारों की याद दिलाई है। अब जबकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली का बॉस कोई नहीं है, तो प्रतिष्ठा का लड़ाई पीछे छोड़ काम पर ध्यान हो। दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच 2015 से ही चली आ रही अधिकारों की जंग को लेकर आज देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से उलट सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपराज्यपाल दिल्ली में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, एलजी को भी कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा। सरकार बनाम उपराज्यपाल के बीच विवाद जगजाहिर है। हर मामले में दिल्ली सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमला करती रही है। हाईकोर्ट ने अगस्त 2016 में दिए फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि दिल्ली देश की राजधानी है और केंद्र शासित होने के चलते उपराज्यपाल ही दिल्ली के बॉस हैं। उनकी अनुमति जरूरी है। इस फैसले के बाद अधिकांश मामले में दिल्ली सरकार के पर कट गए और उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के बीच विवाद बढ़ता …

बुराड़ी: तंत्र-मंत्र या फिर षडयंत्र

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। देश की राजधानी दिल्ली स्थित बुराड़ी (Burari Case)के संतनगर में एक ही परिवार के 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या की थ्योरी अब उलझती जा रही है। घर से मिले रजिस्टर के आधार पर पुलिस इस घटना को तंत्र-मंत्र से जोड़कर देख रही है, तो परिवार वाले इस घटना के पीछे षडयंत्र का दावा कर रहे हैं। जो भी हो, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। मगर अभी तो यह घटना हम सभी के लिए एक सबक बनकर आई है, जो तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास के खिलाफ सभी को जागृत करती है। देश की राजधानी दिल्ली स्थित बुराड़ी (Burari) के संतनगर में गत दिनों एक ही परिवार के 11 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का जो घरेलू मंजर सामने आया था, उससे हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल दहल गया कि आखिर यह क्या हो गया? अमूमन, अपराध की भी राजधानी समझी जाने वाली दिल्ली में अब यह कौन सी नई शातिर परंपरा शुरू हो गई कि चाह कर भी दिल्ली पुलिस के लंबे हाथ उस शातिर व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएंगे जो इस घटना का असली मास्टर माइंड होगा। हालांकि, रोज बदल रहे घटनाक्रम में कभी पुलिस की थ्योरी सामूहिक सुसाइड तो कभी किसी तांत्रिक बाबा की ओर घूम रही…

बुराड़ी की घटना के मायने बेहद गंभीर

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। देश में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं यह बुराड़ी की घटना (Burari Case)से एक बार साबित हो गया है। इसी तरह का एक मामला कुछ वर्षों पहले राजस्थान में सामने आया था। सवाल है कि आखिर हम सही-गलत की पहचान को लेकर आज तक दुविधा में क्यों फंसे हुए हैं? राष्ट्रीय राजधानी या देश के किसी और हिस्से में आत्महत्या की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। मगर एक ही परिवार के 11 सदस्यों की आत्महत्या ने पूरे देश को जरूर सकते में डाल दिया है। संत नगर के बुराड़ी में हुई इस सामूहिक आत्महत्या का केस इससे पहले शायद ही देखा गया हो। आम तौर पर आत्महत्या करने की वजह तनाव या पैसे की तंगी होती है। कई बार किसी बेहद करीबी शख्स की मौत या लंबी बीमारी से भी परेशान होकर लोग आत्महत्या कर लेते हैं। हालांकि, परिवार के 11 सदस्यों की आत्महत्या में अब तक मिली जांच में पता चला है कि परिवार ने शायद तंत्र-मंत्र के प्रभाव में आकर ऐसा कदम उठाया। इस मामले ने 29 सितंबर 2013 के उस मामले की याद ताजा कर दी है, जिसमें राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में तीन बच्चों समेत परिवार के सभी आठ लोगों ने होली से एक दि…

काला के संदेश को समझें हम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। हर फिल्म की बनावट पर अपने समय, काल और परिस्थितियों की छाप जरूर होती है लेकिन हाल ही में आई रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ (Rajinikanth Film Kaala) इससे आगे बढ़कर अपना सांस्कृतिक प्रतिरोध दर्ज कराती है, यह अपनी बुनावट में सदियों से अपना वर्चस्व जमाये बैठे ब्राह्मणवादी संस्कृति की जगह दलित बहुजन संस्कृति को पेश करती है और पहली बार मुख्यधारा की कोई फिल्म बहुजनों के आत्मा की बात करती है। यह फिल्म जो संदेश देना चाह रही है, उसे आत्मसात करना ही होगा। ‘पुरोहितों ने पुराणों की प्रशंसा लिखी है। कम्युनिस्टों और विवेकवादी कई लेखकों ने इन पुराणों की टीकायें लिखी हैं, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा कि हमारी भी कोई आत्मा है जिसके बारे में बात करने की जरूरत है।’ (कांचा इलैया की किताब “मैं हिन्दू क्यों नहीं हूं से) फिल्में मुख्य रूप से मनोरंजन के लिए बनायी जाती हैं लेकिन सांस्कृतिक वर्चस्व को बनाए रखने में फिल्मों की भी भूमिका से इनकार नही किया जा सकता है। हर फिल्म की बनावट पर अपने समय, काल और परिस्थितियों की छाप जरूर होती है लेकिन हाल ही में आई रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ इससे आगे बढ़कर अप…

पानी को लेकर गंभीर हों हम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में करीब साठ करोड़ लोग पानी की घोर कमी (Heavy Water Crisis)का सामना कर रहे हैं। 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि दस-बारह साल बाद क्या होगा। इसरो के पूर्व अध्यक्ष के.कस्तूरीरंगन का कहना है कि भारत के जल(water) उपयोग में कृषि-कार्यो में होने वाले इसके इस्तेमाल को पचास फीसद से नीचे लाने की जरूरत है। साथ ही, जल की एक-एक बूंद को बचाने और उसके प्रबंधन की कोशिश की जानी चाहिए। कस्तूरीरंगन का यह आग्रह दरअसल वक्त का तकाजा है। भारत में जल संकट दिनोंदिन और गहराता जा रहा है। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में करीब साठ करोड़ लोग पानी की घोर कमी का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है। ऐसे में, अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले दस-बारह साल बाद कैसे भयावह हालात होंगे। अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होने की कथित भविष्यवाणी सही हो या नहीं, यह अभी से दिख रहा है कि सामा…