राजनीतिक दलों ने विश्वविद्यालय में गोशाला का बेजा विरोध
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के बिशनखेड़ी में बनने वाले नए परिसर में गोशाला खुलने का प्रस्ताव जैसे ही सामने आया, राजनीतिक दलों समेत एक विशेष समूह ने विरोध शुरू कर दिया। मीडिया ने भी इस मसले को पूरी तरजीह दी है, लेकिन कुछेक बड़े समाचार चैनलों और अखबारों ने तथ्यों के साथ न केवल छेड़छाड़ की है, बल्कि समूचे प्रकरण को अलग रंग देने की कोशिश भी की है। इस विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो उसने तब तूल पकड़ा जब संस्थान के नए परिसर में बची भूमि पर गोशाला खोलने के लिए विज्ञापन दिया गया, जिसमें कई संस्थाओं को आमंत्रित किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह कहना है कि नए परिसर में बची पांच एकड़ जमीन में से दो एकड़ में गोशाला खोले जाने की योजना है। गोशाला के लिए विश्वविद्यालय अपना धन व्यय नहीं करेगा, बल्कि इसे आउटसोर्सिग के जरिए चलाया जाएगा। इससे साफ हो जाता है कि इस मामले को लेकर जबरन विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। माखनलाल ऐसा पहला विश्वविद्यालय नहीं है, जिसमें गोशाला खोलने का फैसला लिया गया हो। देश के कई संस्थानों में पहले से ही गो...