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चार साल की अच्छाइयों पर ध्यान दीजिए

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल के कार्यकाल में क्या किया और क्या नहीं, यह बहस का विषय जरूर है। मगर इस दौरान कई ऐसी भी योजनाएं हैं, जो समाज में बड़े बदलाव का वाहक बनीं और भारतीय संस्कृति को फिर से जीवित करने का जरिया। स्वच्छता मिशन, उज्ज्वला योजना व राष्ट्रीय राजमार्गो के विकास को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उम्मीद है कि मोदी सरकार (Modi Government)अपने इस मिशन को जारी रखेगी और आगामी वर्षो में हमें बदलाव दिखेगा। आम चुनाव की उल्टी गिनती का साल शुरू हो गया है। मोदी सरकार के चार साल बीतने के बाद अपने लोकतांत्रिक समाज में विपक्ष की ओर से सवाल नहीं उठते तो ही हैरत होती। इसलिए राहुल गांधी हों या मायावती या तेजस्वी या फिर अखिलेश या फिर 2019 में अजरुन की तरह सत्ता की आंख पर निशाना गड़ाए बैठीं ममता बनर्जी सबने सरकार को नाकाम बताया है। अव्वल तो इन सुरों में मीडिया को विवेकी ढंग से सुर मिलाना चाहिए था, लेकिन उसने नीर-क्षीर को किनारे रख दिया है। लेकिन मोदी सरकार की कम से कम दो योजनाएं ऐसी हैं, जिन्होंने ना सिर्फ गेम चेंजर, बल्कि सामाजिक बदलाव की भूमिका निभाई है...

बेरोजगारी ही बड़ी समस्या मोदी स्वयं इन समस्याओं के समाधान की पहल कर रहे हैं

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यह कहने में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन वादों को पूरा करने की है, जो उसने अपने घोषणा-पत्र में किए थे। इनमें दो वादे खास थे। एक-किसानों को उनकी लागत से अधिक मूल्य प्रदान करना एवं कृषि को मुनाफे का कारोबार बनाना। दो-बड़े पैमाने पर रोजगारों का सृजन करना। ये दोनों ही मुद्दे ऐसे हैं, जिन्हें एक दिन में नहीं सुलझाया जा सकता, बल्कि ये दोनों ही काम समय लेंगे। गंभीर समस्या का समाधान कोई सरकार जल्दी नहीं कर सकती। फिर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इन समस्याओं के समाधान की पहल कर रहे हैं। इसीलिए तो वे देश में रोजगार की स्थिति की समीक्षा भी करने जा रहे हैं, आगामी रविवार को ही। पर विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यही है कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह से विफल रही है। सरकार भी अपने पक्ष में तर्क तो देती है, लेकिन वह कोई ठोस व स्पष्ट आंकड़ा बताने में असमर्थ ही है। संगठित क्षेत्र के रोजगारों का तो आंकड़ा दिया भी जा सकता है, मगर असंगठित क्षेत्र इतना व्यापक है कि उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। यह पेंच इसे और भी जटिल बना देता है। इन्हीं सब जटिलताओं से उबरने...