क्या मानसून इस बार कमजोर रहने वाला है? यह चेतावनी है, न कि रिपोर्ट
तो क्या मानसून इस बार कमजोर रहने वाला है? यूं भारतीय मौसम विभाग द्वारा जो रिपोर्ट जारी की गई है, वह मानसून के पिछले 50 वर्षो के अध्ययन पर आधारित है और उसका सारांश यह है कि इस अवधि में हमारे देश में मानसून की बारिश में धीरे-धीरे कमी आती चली जा रही है। रिपोर्ट बता रही है कि जो बादल पानी बरसाते हैं, वे आसमान में छह से साढ़े छह हजार मीटर की ऊंचाई पर होते हैं। 50 वर्ष पहले यह बादल घने होते थे और मोटे भी, पर अब साल-दर-साल इनकी मोटाई कम होती चली जा रही है और कमी इनकी सघनता में भी आ रही है। यह अध्ययन गलत नहीं है। महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य ‘मेघूदत’ वैसे तो प्रेम-काव्य है। इसके दो खंड हैं-पूर्वमेघ और उत्तरमेघ, जो संस्कृत में लिखे गए हैं और जिनमें सांसारिक प्रेम का अद्भुत वर्णन है, मगर इनमें अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए कालिदास ने जिन प्रतीकों का सहारा लिया है, वे मेघ यानी बादल और बारिश से जुड़े हुए हैं। जिनका लब्बोलुआब यह है कि धरती पर जितने घने जंगल होते हैं, आसमान में उतने ही घने और काले बादल। कालिदास वैज्ञानिक नहीं, संत थे, पर उनकी बात का खंडन आज के बड़े से बड़े ...