पर्यावरण: पंच तत्वों में संतुलन बनाए रखने की चेतना पंचतत्व का भैरव नर्तन
क्षिति जल पावक गगन समीरा-शास्त्र वचन है कि मानव शरीर इन्हीं पांच तत्वों से बना है। भूमि, जल व वायु पर्यावरण के त्रिदेव हैं। मध्यप्रदेश में नर्मदा यात्रा के माध्यम से एक विशाल और व्यापक अभियान हफ्तों चला है। इसके जरिए पर्यावरण के मूलाधार के रूप में इन्हीं पंच तत्वों में संतुलन बनाए रखने की चेतना का अद्भुत विकास हुआ। इसे स्थायित्व देना जरूरी है। व्यवहारत: देखें तो मिट्टी हमारी मां है, क्योंकि सभी प्रकार का भोजन भूमि से ही मिलता है। जल ही जीवन-दाता है। वह सभी जैविक-अजैविक तत्वों में जीवन का संचार करता है। प्राणवायु यानी ऑक्सीजन के बिना तो हम पांच मिनट भी जीवित नहीं रह सकते। सूर्य-ताप मूलाधार है। उससे घास, वनस्पतियां और वन जन्म लेते हैं। घास-पात खाने वाले मवेशी और वन्यप्राणी इन्हीं पर निर्भर हैं और इन पर जीवित रहते हैं, शेर-तेंदुए जैसे मांस-भोजी पशु। इस प्रकार, प्रकृति के सभी तत्वों जमीन, जलवायु, जंगल, जन एवं जानवरों से मिलकर है, हमारा पर्यावरण, जिसके सभी तत्व परस्पर निर्भर हैं। जब प्रकृति में पर्यावरण-संतुलन की यह स्वपोषित व्यवस्था अंतरनिहित है, तब फिर जलवायु-परिवर्तन ज...