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कानूनी सख्ती पर अमल भी किया जाए

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राजस्थान ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को मौत की सजा के लिए संशोधन बिल पारित कर दिया है। मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान अब देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां सरकार ने बलात्कार के मामलों में दोषी लोगों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इस बिल के पास होने पर अब न सिर्फ बलात्कार की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों को कड़ी सजा भी दिलाई जा सकेगी। कुछ समय पहले हरियाणा ने भी 12 साल तक की कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म होने पर आरोपी को कम से कम 14 साल का कठोर कारावास या मौत की सजा के नए प्रावधानों पर मुहर लगाई है। इसके अलावा वहां सामूहिक दुष्कर्म होने पर कम-से-कम 20 साल कठोर कारावास की सजा का प्रावधान भी किया गया है। हरियाणा में तो बच्चियों से छेड़छाड़ और उनका पीछा करने की सजा भी बढ़ा दी गई है। आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में पांच सालों में 12 साल से कम उम्र की 377 बेटियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हुई हैं। यह दुखद, चिंतनीय और कटु सच है कि इस मामले में देश के अधिकतर राज्यों के आंकड़े भयभीत करने वा...

समाज में अपनों से ही शर्मसार होती मानवता बेहद निराशाजनक

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Human society:  राजधानी दिल्ली में 2017 की आपराधिक गतिविधियों में पुलिस ने इसी माह जारी आंकड़ों में कहा है कि रेप के 97% मामलों में महिलाएं अपनों की ही शिकार होती है। दिल्ली ही नही यह तस्वीर सारे विश्व में देखने को मिलेगी। अपनों से मतलब साफ है कि या तो रिश्तेदार या जान-पहचान वाले या फिर दोस्त। रेप के मामलों में ले देकर यही निकल के आता है कि रेप करने वाला आरोपी और रेप पीड़िता एक दूसरे को जानते हैं। जानपहचान का ही फायदा उठाते हुए यह महिलाओं को अपना आसानी से शिकार बना लेते हैं। यह दूसरी बात है कि गाहे बेगाहे निर्भया जैसे कांड अंजान लोगों द्वारा कर दिए जाते हैं और मीडिया की सुर्खियां बन जाते हैं। निर्भया जैसे कांड होते ही सरकारी, गैरसरकारी संगठन और ना जाने कौन-कौन आगे आकर झकझोरने की कोशिश में जुट जाते हैं। यहां निर्भया जैसे कांड को कमतर देखने की कतई मंशा नहीं है और इस तरह की घटनाओं की जितनी निंदा की जाए वो कम है और यह भी कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति ना हो इसके लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। अखबारों में प्रतिदिन कोई ना कोई खबर रेप या छेड़छाड़ की आती ही है जो अपने आप में गंभीर व म...

दुष्कर्म की सख्त सजा जरूरी, आने वाले दिनों में सुरक्षित समाज की कल्पना साकार हो सकेगी

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मध्यप्रदेश में अब बारह साल की आयु से कम की नाबालिग बालिकाओं से दुष्कर्म और किसी भी उम्र की महिला से सामूहिक दुष्कर्म करने वालों को मृत्युदंड दिया जाएगा। हाल ही में दंड विधि संशोधन विधेयक को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। महिलाओं व नाबालिग बच्चियों के साथ बढ़ते अपराधों पर कार्रवाई के लिए सख्त कानून के मसौदे को मंजूरी देने वाला यह विधेयक मौजूदा विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। ऐसे में नाबालिग से रेप और गैंगरेप के आरोपी को मृत्युदंड की सजा देने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा। इतना ही नहीं प्रलोभन देकर शारीरिक शोषण करने पर सजा के लिए 493क में संशोधन करके इसे भी अपराध बनाने का प्रस्ताव किया गया है। महिलाओं के खिलाफ आदतन अपराधी को धारा-110 के तहत गैर जमानती अपराध और जुर्माने की सजा देने के साथ महिलाओं का पीछा करने का अपराध दूसरी बार साबित होने पर कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा। बालिकाओं के साथ होने वाली दुष्कर्म की घटनाओं पर अंकुश लगाने और दोषियों को सख्त सजा देने की बात पर जोर देते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने बैठक में यह विधेयक पारित किया है। हाल...