किसानों की समस्या का हल, आंदोलन या आत्महत्या नहीं
देशभर में चल रहे किसान आंदोलनों के परिप्रेक्ष्य में एक बात साफ हो जानी चाहिए कि आंदोलन, आत्महत्या या केवल कर्जमाफी से किसानों की समस्या(Farmer Problem)का हल नहीं होने वाला है। देश का किसान आज के दौर में ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां उसे कोई विकल्प नजर नहीं आता। किसानों को मानसून की बेरुखी पर भी, और फसल तैयार होतेे समय भी, आंधी तूफान आने पर भी नुकसान होता है। किसान इन सबसे जैसे तैसे निपट भी लेता है तो बाजार में लागत भी नहीं मिले तो किसान अपने आपको ठगा महसूस करता है। लेकिन मजेदार बात यह है कि इन सभी बातों का फायदा बिचौलियों को मिल रहा है। फसल के समय किसान को पूरा पैसा नहीं मिलता और जरुरत के समय उपभोक्ता को कोई सामान सस्ता नहीं मिलता। इसका खामियाजा सरकार को भी भुगतना पड़ता है। सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। सरकार किसानों की आय को दोगुणा करने के लिए योजनाए बना रही है। खेती में लागत कम करने के सरकारी प्रयासों के साथ ही दीर्घकालीन नीति बनाकर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। देशभर में किसानों के कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण आत्महत्या क...