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किसानों की समस्या का हल, आंदोलन या आत्महत्या नहीं

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देशभर में चल रहे किसान आंदोलनों के परिप्रेक्ष्य में एक बात साफ हो जानी चाहिए कि आंदोलन, आत्महत्या या केवल कर्जमाफी से किसानों की समस्या(Farmer Problem)का हल नहीं होने वाला है। देश का किसान आज के दौर में ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां उसे कोई विकल्प नजर नहीं आता।  किसानों को मानसून की बेरुखी पर भी, और फसल तैयार होतेे समय भी, आंधी तूफान आने पर भी नुकसान होता है। किसान इन सबसे जैसे तैसे निपट भी लेता है तो बाजार में लागत भी नहीं मिले तो किसान अपने आपको ठगा महसूस करता है। लेकिन मजेदार बात यह है कि इन सभी बातों का फायदा बिचौलियों को मिल रहा है। फसल के समय किसान को पूरा पैसा नहीं मिलता और जरुरत के समय उपभोक्ता को कोई सामान सस्ता नहीं मिलता। इसका खामियाजा सरकार को भी भुगतना पड़ता है। सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। सरकार किसानों की आय को दोगुणा करने के लिए योजनाए बना रही है। खेती में लागत कम करने के सरकारी प्रयासों के साथ ही दीर्घकालीन नीति बनाकर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं। देशभर में किसानों के कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण आत्महत्या क...

किसान आंदोलन और इन आंदोलनों में, दुनिया सिद्धांतों से नहीं चलती

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किसान आंदोलन और इन आंदोलनों पर राजनीति के इस दौर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से आया यह बयान गौरतलब है कि अगर किसानों के कर्ज माफ किए गए तो इससे देश में महंगाई बढ़ेगी और इसका अर्थव्यवस्था पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा। सैद्धांतिक तौर पर यह बयान गलत भी नहीं है। उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जब अपने चुनावी वादे के अनुसार किसानों की कर्ज माफी का फैसला किया था, तब हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने भी वैसा ही कुछ कहा था, जैसा अब आरबीआई ने कहा है और उनकी बात भी सैद्धांतिक रूप से सही थी। तथ्य यह भी है कि बीते 15-20 वर्षो में देश के कई राज्यों में कई बार किसानों के कर्ज माफ किए गए। उत्तरप्रदेश में तो जब भी सरकार बदलती है, तब किसानों के कर्ज अकसर माफ कर दिए जाते हैं। देश में लगभग सभी राज्यों में कभी न कभी यह काम होता रहा है। वर्ष-2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन केंद्र सरकार ने देश के सभी किसानों का कर्जा लगभग पूरा ही माफ कर दिया था। ऐसे में यह सवाल बिलकुल सही है कि कर्ज माफी से किसानों की सेहत पर फर्क क्या पड़ता ...

किसानों को आधार से मिलेगा सहारा

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देश में किसानों की हालत को लेकर समय-समय पर उठने वाले सख्त सवालों का जवाब देने के लिए केंद्र सरकार बड़ी योजना लाने वाली है। सरकार की मंशा के मुताबिक, अब किसानों को मिलने वाली सब्सिडी और प्राकृतिक आपदा के तहत मिलने वाली राशि को बिचौलिए हड़प नहीं पाएंगे। सरकार अब किसानों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य करने जा रही है, जिससे सब्सिडी व सहायता राशि सीधे उनके खाते में जमा कराई जा सकेगी। कृषि मंत्रलय इस संबंध में अधिसूचना जारी कर चुका है। इसमें 31 मार्च-2018 तक देश के सभी किसानों के आधार कार्ड बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीद है कि इस प्रावधान के बाद किसानों के दिन सुधरेंगे। अब तक की जो स्थिति है, उसे देखें, तो सरकार की ओर से राज्यों को भेजी जाने वाली सब्सिडी-सहायता राशि किसानों तक पहुंचने में काफी समय लगता है। इसके अलावा बिचौलियों के फर्जीवाड़े के चलते किसानों को मदद नहीं मिल पाती है। बीज, खाद, कीटनाशक और सूक्ष्म सिंचाई योजना की सब्सिडी में बिचौलिए किसानों से कमाई करते हैं। वहीं, प्राकृतिक आपदा होने पर केंद्र व राज्य सरकार की ओर से मुहैया कराई जाने वाली सहायता राशि में भी बंदरबांट ...