अपराध के दलदल में फंसते बच्चे को सही रास्ते पर लाने का एक भी उपक्रम हम नहीं कर सके
रेयान स्कूल के सनसनीखेज प्रद्युम्न मर्डर केस में सीबीआई ने जो खुलासा किया है, वह हैरतअंगेज है। रोज ही नए-नए खुलासे हो रहे हैं। माना जाना चाहिए कि आने वाले दिनों में कई ऐसे राज सामने आएंगे, जो हमारी कल्पना से परे थे। लेकिन सवाल यह भी है कि हमारे बच्चे अपराध के दलदल में जिस तरह फंसते जा रहे हैं, वह क्या सही है? बच्चों में अपराध करने के विचार कहां से आ रहे हैं, हम इस दिशा में कभी सोच पाएंगे? सिर्फ फिल्म और टीवी को ही जिम्मेदार बताकर जिम्मेदारी टालने की जो प्रवृत्ति हमने बना रखी है, वही बच्चों को हिंसक बनाने में काफी हद तक कसूरवार है। बच्चों का अपराध की तरफ जाना आज का किस्सा नहीं है। जुवेनाइल एक्ट का होना बताता है कि अब हिंसा की कोई उम्र नहीं रह गई है। रेयान स्कूल में पढ़ने वाला ग्यारहवीं का छात्र प्रद्युम्न की हत्या का आरोपी है। एक मासूम बच्चे की गला रेतकर की गई हत्या के इस दर्दनाक मामले में आए नए मोड़ से फिर यह सवाल उठा है कि नई पीढ़ी में यह दिशाहीनता और आक्रामकता क्यों आ रही है? आखिर कैसे बच्चे बड़े कर रहे हैं हम? इससे पहले भी स्कूलों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जो बच्चों में ब...