काले धंधे को बढ़ावा देती बिटकॉइन, यह भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम को झटका लगने जैसा



आयकर विभाग ने कर चोरी के मामले में बेंगलुरु की जांच इकाई की अगुवाई में 13 दिसंबर को देश के कई प्रमुख बिटकॉइन एक्सचेंजों दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि और गुरुग्राम सहित नौ जगह छापे मारे। यह कार्रवाई आयकर विभाग की धारा 133ए के तहत की गई। इस धारा के तहत कार्रवाई का मकसद निवेशकों व व्यापारियों की पहचान के लिए प्रमाण जुटाना, उनके द्वारा किए गए सौदों और दूसरे पक्षों की पहचान तथा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों आदि का पता लगाना है। देश में बिटकॉइन के मामले में यह पहली सबसे बड़ी कार्रवाई है। बिटकॉइन की कीमत में हाल के दिनों में आई भारी उछाल से सरकार चिंतित है। अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने के बाद बिटकॉइन की कीमत 18 हजार डॉलर हो गई है। बिटकॉइन को शिकागो बोर्ड वायदा में सूचीबद्ध किया गया है।
बीते दिनों ज्यादा लोगों द्वारा इसके इस्तेमाल के कारण एक्सचेंज की बेवसाइट बार-बार ठप हो रही थी। चूंकि, इसके बरक्स अब भी देश में किसी तरह का नियमन नहीं है इसलिए सरकार इस संबंध में नीति बनाने पर विचार कर रही है। इस वर्ष इसकी कीमत में 13 सौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बिटकॉइन आभासी मुद्रा है। इसके बढ़ते चलन से अधिकांश देशों के केंद्रीय बैंक चिंतित हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बिटकॉइन समेत तमाम आभासी मुद्राओं के प्रयोग करने वालों, धारकों व कारोबारियों को इनसे जुड़े संभावित वित्तीय, परिचालनात्मक कानूनी, उपभोक्ता संरक्षण एवं सुरक्षा जोखिमों को लेकर आगाह किया है। इस साल मार्च में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आभासी मुद्राओं पर अनुशासनात्मक समिति का भी गठन किया था।
बिटकॉइन को डिजिटल युग का नया वर्जन माना जा सकता है। इसे क्रिप्टो करेंसी भी कहा जाता है। बिटकॉइन के अलावा स्टीम, डैश, इथेरियम, रिपल, लिटेक्वाइन, डोजेक्वाइन आदि भी आभासी मुद्राएं दुनिया में मौजूद हैं, जिसकी भौतिक उपस्थिति नहीं होती है। इन मुद्राओं में बिटकॉइन सबसे अधिक लोकप्रिय है। बिटकॉइन का इतिहास सिर्फ आठ साल पुराना है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष-2017 में कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग 2.9 से 5.8 मिलियन लोग आभासी मुद्रा का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में फिलहाल इसके पांच लाख से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं और प्रतिदिन ढाई हजार लोग इसमें शामिल हो रहे हैं। बिटकॉइन पारंपरिक मुद्राओं के विपरीत किसी देश या बैंक से संबद्ध नहीं होता है और न ही इसका कोई भंडार है। बिटकॉइन ट्रांजेक्शन लेजर पर काम करता है, जिसे इसके उपयोगकर्ता संयुक्त रूप से नियंत्रित करते हैं एवं इसके बही को क्रिप्टोग्राफिक तकनीक के जरिए जांचा व परखा जाता है। इसके लेन-देन के लिए डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए गए संदेश को प्रसारित किया जाता है, जिसकी सत्यता की जांच विश्वभर में फैले कम्प्यूटर के विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिए की जाती है।
देखा जाए तो बिटकॉइन का लेन-देन आपसी समझ और विश्वास पर आधारित है, जिसका लेन-देन वेबसाइट पर किया जाता है, जो यूजर के बीच सीधे होता है। अर्थात इसके लेन-देन में बिचौलिए की भूमिका नहीं होती है। इसका स्वरूप मोबाइल एप या कम्प्यूटर प्रोग्राम की तरह है, जिसके तहत उपयोगकर्ता को बिटकॉइन वॉलेट मुहैया कराया जाता है, जो यूजर को बिटकॉइन भेजने व प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। बिटकॉइन लेन-देन के जरिए खरीदे जाते हैं। इस प्रक्रिया के अंतर्गत पहले एक खाता खोला जाता है, फिर उस खाते में राशि अंतरित की जाती है, ताकि बिटकॉइन खरीदे जा सकें। इसका लेन-देन प्रतिभागियों द्वारा न्यूनतम शुल्क पर किया जाता है। इसका एक बार भुगतान करने के बाद उसे वापस नहीं किया जाता है। लेन-देन में यूजर की निजता सुरक्षित रहती है।
बिटकॉइन खरीदने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट बिटकॉइन डॉट कॉम पर जाना होता है। फिर माइनिंग नामक प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसमें कम्प्यूटर द्वारा दिए गए गणित के कठिन सवालों को हल करना होता है। सवाल का प्रत्येक उत्तर 64 अक्षरों का होता है। हर सवाल के हल करने पर कुछ बिटकॉइन दिए जाते हैं। बिटकॉइन को रखने के लिए यूजर्स को 27 से 34 अक्षरों या अंकों के कोड के रूप में अपने पते को निबंधित करना होता है, जिस पर बिटकॉइन भेजे जाते हैं। इस पते को बिटकॉइन वॉलेट में सुरक्षित रखा जाता है, इसी में बिटकॉइन भी रखे जाते हैं। पेपाल, माइक्रोसॉफ्ट, डेल, न्यूएग, एक्सपीडिया और डिश नेटवर्क समेत दुनियाभर की कई कंपनियां बिटकॉइन के जरिए लेन-देन करती हैं। बिटकॉइन के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए माइनर को पुरस्कार देने का भी चलन है। इसको करने वालों को वॉलंटियर माइनर के नाम से जाना जाता है।
वर्तमान मुद्रा की तरह ही बिटकॉइन का मुद्रास्फीति से कोई लेना-देना नहीं होता है। बाजार के उतार-चढ़ाव से भी यह मुक्त है। गैरकानूनी तरीके से इसका लेन-देन होने के कारण इससे जुड़े विवाद में किसी को सजा नहीं दी जा सकती है। चूंकि, यह किसी बैंक से जुड़ा नहीं है इसलिए, इसका नियामक भी नहीं होता है। इसकी कीमत वितरण में आई बिटकॉइन की संख्या से तय की जाती है। बिटकॉइन के वितरण की उच्चतम संख्या 210 लाख तक रखी गई है। हाल ही में दुनिया के कई देशों जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, रूस, स्पेन व इटली के कुछ संस्थानों पर रेनसमवेयर वायरस का हमला हुआ था, जिसके कारण कम्प्यूटर्स ने काम करना बंद कर दिया था। साइबर हमले से प्रभावित संस्थानों से फिरौती के रूप में बिटकॉइन की मांग की गई थी।
बिटकॉइन की बढ़ती लोकप्रियता ने गैरकानूनी चीजें खरीदने में इसके प्रयोग को बढ़ावा दिया है। सच कहा जाए तो आज आभासी मुद्रा का इस्तेमाल कानूनी तरीके से कम, लेकिन गैरकानूनी तरीके से अधिक किया जा रहा है। बिटकॉइन को अप्रैल में जापान ने कानूनी मान्यता दी है। अर्जेटीना में भी इसका इस्तेमाल आधिकारिक मुद्रा के विकल्प के तौर पर किया जाने लगा है, लेकिन ईरान में प्रतिबंध से बिटकॉइन का इस्तेमाल चोरी-छिपे किया जा रहा है। अमेरिका और चीन में बिटकॉइन का वृहत पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। चीन में इसे आभासी वस्तु मानकर टैक्स के दायरे में रखा गया है। कनाडा में भी इसके जरिए किए जाने वाले कारोबार पर टैक्स लगाया जा रहा है।
यूरोपियन यूनियन में इसका इस्तेमाल चोरी-छिपे किया जा रहा है। जर्मनी में इसे निजी मुद्रा का दर्जा मिला है। भारत में बिटकॉइन का उपयोग प्रारंभिक चरण में है। बिटकॉइन की लोकप्रियता उन देशों में बढ़ रही है, जहां की राष्ट्रीय मुद्रा के सामने समस्या है। ऐसे में इसका इस्तेमाल महंगाई, पूंजी नियंत्रण एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के जरिए गतिरोध पैदा करने के लिए किया जा रहा है। कहा जा सकता है कि पूरी तरह से बिटकॉइन को विश्वसनीय, स्वीकार्य और लोकप्रिय बनने में अनेक मुश्किलें हैं। यह आमजन की समझ से बाहर की चीज है। हां, इसकी महत्ता कारोबारियों एवं गैरकानूनी कार्य करने वाले लोगों मसलन-अराजक तत्वों, तस्करों, सट्टा कारोबारियों के बीच तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि यह उनके लिए हर दृष्टिकोण से मुफीद है।

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