बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया, बेहतरी के साथ ही महंगाई की आहट



अपने चौथे व आखिरी पूर्णकालिक बजट से पहले पेश आर्थिक समीक्षा में केंद्र सरकार ने जीएसटी के असर और कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी के बाबत महंगाई बढ़ने की तरफ इशारा किया है। सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018 का आर्थिक सर्वे संसद में पेश किया। इस आर्थिक सर्वे में जीएसटी के असर से लेकर भारतीयों में लड़के की चाहत से जुड़े 10 नए आर्थिक तथ्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। समीक्षा में सरकार ने माना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया है। इसके नए आंकड़े उभर कर सामने आए हैं। अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। नई कर प्रणाली अपनाने से प्रमुख उत्पादक राज्यों के कर संग्रह में कमी आने की आशंका भी निराधार साबित हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब राज्यों के बीच जीएसटी आधार के वितरण को उनकी अर्थव्यवस्थाओं के आकार से जोड़ दिया गया है। इसी तरह नवंबर 2016 यानी नोटबंदी से लेकर अब तक व्यक्तिगत आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 18 लाख की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस समीक्षा रिपोर्ट में नोटबंदी का जिक्र कहीं नहीं है। ऐसे में यह मान लेना चाहिए कि सरकार ने नोटबंदी के बाद उपजी स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है। अब उसका पूरा फोकस जीएसटी पर है। हालांकि, खेती के विकास की उम्मीद समीक्षा में जताई गई है। अगर ऐसा होता भी है तो माना जाना चाहिए कि आने वाले साल खेती-किसानी के लिए अच्छे रहेंगे। वर्ष 2018 में कृषि ग्रोथ 2.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। चूंकि, आर्थिक समीक्षा के रुख पर ही भावी बजट निर्भर करता है, इसलिए यह मानने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आम बजट में किसानों के लिए रियायतों की घोषणा जरूर की जाएगी। वैसे, समीक्षा में युवाओं के रोजगार पर भी फोकस किया गया है। ऐसे में वित्त मंत्री बजट में युवा वर्ग को भी कई तोहफे दे सकते हैं। आर्थिक समीक्षा में कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी की आशंका चिंतनीय है। सरकार ने चिंता जताई है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 12 फीसदी बढ़ती हैं, तो उसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह आशंका सच साबित हुई तो कच्चा तेल 75 से 80 डॉलर तक पहुंच जाएगा। जाहिर तौर पर भारतीय तेल कंपनियों को भी दाम बढ़ाने होंगे। अगर महंगाई बढ़ती है, तो इसका असर गिरते औद्योगिक उत्पादन पर भी पड़ेगा। सर्वे में औद्योगिक दर 4.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। आर्थिक समीक्षा में अच्छी बात यह है कि साल 2019 में विकास दर 7 से 7.5 रहने की उम्मीद जताई गई है। कुल मिलाकर आर्थिक समीक्षा ने देश की भावी आर्थिक स्थिति की बेहतर उम्मीद दिखाई है। सर्वे से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बेहतर बजट के संकेत दिए हैं। उम्मीद है कि वित्त मंत्री निराश नहीं करेंगे।

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