तेल की धार को रोके सरकार



राजएक्सप्रेस, भोपाल। Petrol Diesel Price: पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। कंपनियां कह रही हैं कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में आई बढ़ोतरी को देखते हुए ही दाम बढ़ाए हैं। लेकिन सरकार को इस मसले पर दखल देकर कीमतें नियंत्रित करनी ही चाहिए।
Petrol Diesel Prices: पेट्रोल और डीजल की कीमतें रविवार को अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। तेल कंपनियों की ओर से सुबह 6 बजे जारी रेट लिस्ट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 33 पैसे महंगा होते हुए 76.24 रुपए का हो गया, जबकि डीजल भी अब तक के अपने इतिहास में सबसे महंगा होते हुए 67.57 रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले दिल्ली में 14 सितंबर-2013 को पेट्रोल की सबसे ज्यादा कीमत 76.06 रुपए थी। बीते करीब चार सप्ताह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों के बढ़ने से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। स्थानीय सेल्स टैक्स और वैट के अनुसार हर राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमत अलग-अलग होती है। देश के सभी प्रदेशों की राजधानियों और मेट्रो शहरों की तुलना में दिल्ली में यह कीमतें फिर भी सबसे कम हैं। बहरहाल, देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में तेज वृद्धि से लोग परेशान हो गए हैं। कंपनियां कह रही हैं कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में आई बढ़ोतरी को देखते हुए ही दाम बढ़ाए हैं। इस दलील में कोई दम नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें काफी समय से लगातार चढ़ रही हैं, लेकिन मध्य अप्रैल से मध्य मई तक दाम लगभग स्थिर थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम 75 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था, लेकिन घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बीते 24 अप्रैल के बाद से ही बढ़नी बंद हो गई थीं। 15 मई के बाद आखिर ऐसा क्या हो गया कि तेल की कीमतें अचानक उछालों में बढ़ती जा रही हैं? सरकार पेट्रेाल-डीजल के दाम बाजार के हवाले करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम बढ़ने की दलील देकर पल्ला नहीं झाड़ सकती। देश में पेट्रोल और डीजल के दाम भले ही किसी भी कारण से बढ़ रहे हों मगर तेल महंगा होने का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। जब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो उसका सीधा असर वस्तुओं के दाम पर पड़ता है।
थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर अप्रैल में पिछले चार महीने में उच्चतम स्तर पर बढ़कर 3.18 फीसद हो गई व खुदरा मुद्रास्फीति की दर 4.58 फीसद पर पहुंच गई तो महंगाई बढ़ना स्वाभाविक ही है। चूंकि बाजार में मौजूद लगभग सभी वस्तुओं की ढुलाई परिवहन पर निर्भर होती है, इसलिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर बहुत सारी चीजों की मूल्य वृद्धि के रूप में सामने आता है। गौरतलब है कि मार्च में थोक महंगाई दर जब 2.47 फीसद दर्ज की गई थी, तब राहत महसूस हुई थी। मुद्रास्फीति में पिछले साल दिसंबर से ही गिरावट बनी हुई थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई और पेट्रोलियम के दाम चढ़े। सरकार जो भी कहे, पर लोगों की जेब पर पड़ रही पेट्रोल-डीजल की मार की अनदेखी तो अब न ही करे। तरीका जो भी हो, इनकी कीमतें अब और नहीं बढ़नी चाहिए।

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