ऑनलाइन अभद्रता पर लगाम जरूरी


राजएक्सप्रेस, भोपाल। Social Media Indecency: सरकार महिलाओं व बच्चों से संबंधित अशिष्ट और अपमानजनक शब्दों की एक सूची तैयार करने की योजना बना रही है। इस फेहरिस्त में शामिल शब्दों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित किया जाएगा। नि:संदेह, सही ढंग से लागू कर त्वरित कार्रवाई की जाए तो यकीनन यह सराहनीय कदम है, क्योंकि ऑनलाइन दुनिया में साझा की जा रही स्तरहीन भाषा और कुत्सित सामग्री दोनों ही असल दुनिया का माहौल बिगाड़ रही हैं।
सरकार महिलाओं व बच्चों से संबंधित अशिष्ट और अपमानजनक शब्दों की एक सूची तैयार करने की योजना बना रही है। इस फेहरिस्त में शामिल शब्दों को सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित किए जाने का विचार है। गौरतलब है कि महिला और बाल विकास मंत्रालय ऑनलाइन पोर्नोग्राफी सामग्री को हटाने के क्रम में इंटरनेट और सोशल मीडिया में अशिष्ट शब्दों पर लगाम लगाने की तैयारी में है। इस क्रम में सरकार ने बच्चों के लिए डॉग, स्टुपिड और महिलाओं के लिए बिच, रेप जैसे शब्दों को ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर अब अस्वीकार्य करार दिया है। महिला और बाल विकास मंत्रालय के मुताबिक अब चित्रों के अजब-गजब शीर्षक भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यही वजह है कि सरकार ने कलात्मक फोटो के नाम पर नंगा बच्चा जैसे शीर्षक भी प्रतिबंधित कर दिए हैं। महिलाओं और बच्चों के सम्मान को चोट पहुंचाने वाले शीर्षक लगाने पर भी पांबदी लगाई गई है। इस विषय में फेसबुक और ट्विटर को भी कहा गया है कि सेक्स और हिंसा के लिए उकसावे वाले शीर्षक अस्वीकार्य होंगे। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम पर विभिन्न एजेंसियों के साथ केंद्र सरकार के तीन मंत्रालयों से चर्चा कर इस ऑनलाइन अभद्रता को रोकने के बारे में सोचा है। इनमें महिला व बाल विकास मंत्रालय, गृह मंत्रालय सीबीआई, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बाल आयोग, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांसड कम्प्यूटिंग शामिल हैं।
आभासी दुनिया हो या असल संसार, मर्यादित परिवेश में स्तरीय भाषा का बहुत महत्व होता है, पर देखने में आ रहा है कि अभिव्यक्ति के ऑनलाइन मंचों पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल सारी सीमाएं पार कर रहा है। आजाद अभिव्यक्ति के नाम पर हर सीमा को पार कर कुछ भी कहने की प्रवृत्ति सबसे ज्यादा सोशल मीडिया में देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया की गैर जिम्मेदार बहसों ने भाषाई स्तर को हद दर्जे तक गिरा दिया है। ऑनलाइन अभिव्यक्ति में विचार की जगह घृणा और उपहास देखने को मिल रहा है। विडंबना ही है कि गाली-गलौज और अपशब्द भी अब विचार विमर्श का हिस्सा बन गए हैं। अभिव्यक्ति के बजाय ये मंच असामाजिक और अविश्वसनीय बातों का अड्डा बन रहे हैं। कभी लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के रूप में अस्तित्व में आए ये साझा मंच आज अराजक चरित्र वाले माध्यम बन गए हैं। अशालीन शब्दों का जमकर प्रयोग हो रहा है। बेवजह बतियाने-गरियाने और वैचारिक दुराग्रह पालने के कारण आभासी संवाद और प्रस्तुति की गुणवत्ता ही खो गई। यही वजह है कि सरकार ऑनलाइन मंचों पर अशिष्ट शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने को लेकर वाकई गंभीर है। अब ऑनलाइन दुनिया में भाषाई अभद्रता देखने को मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। अशालीन शब्दों के इस्तेमाल के वजह से हुई कार्रवाई को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। ऐसे मामलों को रिपोर्ट करने की केंद्रितकृत व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ-साथ रियल टाइम में पोर्न सामग्री हटाने और साइट को ब्लॉक करने का भी प्रबंध किया जाएगा।
हालांकि, भाषागत अराजकता व अशालीनता हर तरह से दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन देखने में आता है कि नकारात्मकता, कटुता और अपमानित करने वाले शब्दों से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम आभासी दुनिया में भी खूब किया जाता है। इतना ही नहीं अशालीन चित्रों के जरिए भी यह बेहूदगी फैलाई जाती है। विकृत मानसिकता का यह खेल हालिया कुछ बरसों में हद से ज्यादा विस्तार पा चुका है। महिला और बाल विकास मंत्रालय के साथ विभिन्न एजेंसियों से हुई चर्चा में भी यही सामने आया है कि महिलाओं और बच्चों की पोनरेग्राफी को रोकना बेहद मुश्किल काम है और इसके लिए विभिन्न एजेंसियों को मिलकर कारगर पहल करनी होगी। बताया जा रहा है कि हर साल चार लाख से अधिक पोर्न तस्वीरें ऑनलाइन प्लेटफार्म पर डाली जाती हैं। इतना ही नहीं अब वाट्सएप पर भी ऐसी सामग्री का आदन-प्रदान बढ़ा है, जो कि बेहद चिंताजनक है। अफसोस यह भी है चित्रों और शब्दों के माध्यम से परोसी जा रही ऐसी ऑनलाइन अभद्रता के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिलाओं को ट्रोल किया जाता है। उन्हें और अपशब्द कहे जाते हैं, धमकियां दी जाती हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें असल दुनिया की पारिवारिक रंजिश का बदला लेने के लिए भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिशोध की विकृत सोच रखने वाले लोग कभी महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें सोशल मीडिया पर डाल देते हैं तो कभी आपत्तिजनक तस्वीरों से महिलाओं को परेशान करते हैं।
हालिया समय में सोशल मीडिया पर महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या काफी बढ़ी है। आधी आबादी आभासी दुनिया में कई मुद्दों पर मुखरता से अपनी बात रख रही है, लेकिन इन मंचों के नकारात्मक इस्तेमाल के चलते लड़कियों और महिलाओं की तस्वीरें चुराना और उन्हें बिगाड़ना भी आम बात है। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 फीसदी लड़कियों के प्रोफाइल की तस्वीरों के साथ ऐसा किया जा रहा है। यह वाकई चिंतनीय है क्योंकि यह न केवल निजता के हनन का मामला है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मसला भी है। कहना गलत नहीं होगा कि अभिव्यक्ति की ऐसी गैर-जिम्मेदार आजादी इन सामाजिक मंचों पर असामाजिकता ही नहीं असुरक्षा भी बढ़ा रही है, जिसका खामियाजा बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा उठा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इंटनेट के विस्तार के साथ बढ़ रही विकृत सोच के चलते बाल पोनरेग्राफी की गंदगी भी बढ़ी है। यह एक खतरनाक कुचक्र है। बाल अश्लीलता बाल शोषण का एक ही वीभत्स रूप है। इंटरनेट पर बच्चों के अश्लील क्लिप्स को देखने की मांग के चलते बच्चों को पोर्न के व्यापार में भी धकेला जाता है। बाल तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में यह ऑनलाइन अभद्रता और अश्लीलता वाकई चिंतनीय है।
नि:संदेह, इंटरनेट पर छाए खुलेपन और तथाकथित अभिव्यक्ति की आजादी ने समाज का गरिमामयी ताना बाना बिखरने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, अंतरजाल पर फैली अश्लीलता वैश्विक स्तर पर भी एक चिंता का विषय बनी हुई है। पर भारत में यह बेलगाम अश्लीलता और भाषाई अभद्रता दिन-ब-दिन और विस्तार ही पा रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार तकनीकी माध्यमों का प्रयेाग करते हुए इंटरनेट पर देखी जाने वाली ही नहीं डाली जाने वाली आपत्तिजनक सामग्री में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कहना गलत नहीं कि भाषाई अभद्रता और अश्लील सामग्री को जी रही मानसिकता का अगला पड़ाव अपराध को अंजाम देना ही होता है। शायद यही वजह है कि भारत में साइबर अपराधों में हर साल 40 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। लंदन की एक यूनिवर्सिटी के अध्ययन में यह दावा किया गया है कि भारत तेजी से साइबर अपराध की धुरी के तौर पर उभर रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार अशिष्ट शब्दों के साथ साथ अश्लील सामग्री पर भी प्रबंध लगाने की सोच रही है। गौरतलब है कि अभी सीबीआई का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी देश की एजेंसी के साथ पोर्न सामग्री के मामले में कार्रवाई को लेकर कोई समझौता नहीं है। पर आगे सरकार इस पर सभी जरूरी कदम उठाने की सोच रही है।

डॉ. मोनिका शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार)

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