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काला के संदेश को समझें हम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। हर फिल्म की बनावट पर अपने समय, काल और परिस्थितियों की छाप जरूर होती है लेकिन हाल ही में आई रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ (Rajinikanth Film Kaala) इससे आगे बढ़कर अपना सांस्कृतिक प्रतिरोध दर्ज कराती है, यह अपनी बुनावट में सदियों से अपना वर्चस्व जमाये बैठे ब्राह्मणवादी संस्कृति की जगह दलित बहुजन संस्कृति को पेश करती है और पहली बार मुख्यधारा की कोई फिल्म बहुजनों के आत्मा की बात करती है। यह फिल्म जो संदेश देना चाह रही है, उसे आत्मसात करना ही होगा। ‘पुरोहितों ने पुराणों की प्रशंसा लिखी है। कम्युनिस्टों और विवेकवादी कई लेखकों ने इन पुराणों की टीकायें लिखी हैं, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा कि हमारी भी कोई आत्मा है जिसके बारे में बात करने की जरूरत है।’ (कांचा इलैया की किताब “मैं हिन्दू क्यों नहीं हूं से) फिल्में मुख्य रूप से मनोरंजन के लिए बनायी जाती हैं लेकिन सांस्कृतिक वर्चस्व को बनाए रखने में फिल्मों की भी भूमिका से इनकार नही किया जा सकता है। हर फिल्म की बनावट पर अपने समय, काल और परिस्थितियों की छाप जरूर होती है लेकिन हाल ही में आई रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ इससे आगे बढ...

पानी को लेकर गंभीर हों हम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में करीब साठ करोड़ लोग पानी की घोर कमी (Heavy Water Crisis)का सामना कर रहे हैं। 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि दस-बारह साल बाद क्या होगा। इसरो के पूर्व अध्यक्ष के.कस्तूरीरंगन का कहना है कि भारत के जल(water) उपयोग में कृषि-कार्यो में होने वाले इसके इस्तेमाल को पचास फीसद से नीचे लाने की जरूरत है। साथ ही, जल की एक-एक बूंद को बचाने और उसके प्रबंधन की कोशिश की जानी चाहिए। कस्तूरीरंगन का यह आग्रह दरअसल वक्त का तकाजा है। भारत में जल संकट दिनोंदिन और गहराता जा रहा है। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में करीब साठ करोड़ लोग पानी की घोर कमी का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है। ऐसे में, अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले दस-बारह साल बाद कैसे भयावह हालात होंगे। अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होने की कथित भविष्यवाणी सही हो या नहीं, यह अभी से दिख रहा है ...

चीन को भारत का कड़ा जवाब

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। भारत और पाक के साथ त्रिपक्षीय वार्ता (India Pakistan China Trilateral Summit)का जो शिगूफा चीन ने फेंका है, उसे भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। यह सुझाव भारत में चीन के राजदूत ने दिया था। कुछ भी हो, इसके पीछे चीन की ही चाल है, क्योंकि अपने देश से इशारा मिले बिना राजदूत कुछ नहीं करते। भारत और पाक के साथ त्रिपक्षीय वार्ता का जो शिगूफा चीन ने फेंका है, उसे भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि यह सुझाव चीन सरकार की ओर नहीं आया था, बल्कि दिल्ली स्थित चीनी दूतावास में आयोजित एक सेमिनार में भारत में चीन के राजदूत ने रखा था। सेमिनार का विषय था कि वुहान के बाद बदले माहौल में भारत और चीन के रिश्ते कितनी तेजी से और कहां तक ले जाए जा सकते हैं। भारत सरकार ने इसे रत्ती-भर तवज्जो नहीं दी और इसे चीनी राजदूत की निजी राय करार दिया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह संभव है कि अपनी सरकार के इशारे के बगैर, चीनी राजदूत ऐसा सुझाव रखते? दरअसल, ऐसा कर चीन ने भारत का रुख भांपने की कोशिश की होगी कि मौजूदा दौर में भारत पर किस हद तक डोरे डाल कर अपने हित साधे जा सकते हैं। इसलिए ...

नगालैंड में फिर बढ़ रही अशांति

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। नगालैंड में सुरक्षा बलों पर किए जा रहे उग्रवादी हमले (Nagaland Militants Attack)बता रहे हैं कि राज्य में अशांति का दौर थमा नहीं है। उग्रवादियों ने गत 14 दिनों में तीन बार असम राइफल्स के जवानों को निशाना बनाया। यह हरकत उग्रवादियों के नगालैंड में फिर से सिर उठाने की परिचायक है। नगालैंड में सुरक्षा बलों पर उग्रवादी हमले बता रहे हैं कि राज्य में अशांति का दौर थमा नहीं है। उग्रवादियों ने पिछले 14 दिनों में तीन बार असम राइफल्स के जवानों को निशाना बनाया। रविवार को राज्य के मोन जिले में नगा उग्रवादियों के हमले में चार जवान शहीद हो गए। छह जून को भी इसी जिले में नगा उग्रवादियों ने असम राइफल्स के एक शिविर पर धावा बोला था। अभी 20 जून को उग्रवादियों ने फिर जवानों पर हमला किया। राहत की बात यह है कि इस बार वे अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। पिछले महीने की तीन तारीख को मोन जिले के चांगलांसू में नगा उग्रवादियों के हमले में असम राइफल्स के आठ जवान शहीद हो गए थे। हिंसा का यह सिलसिला चिंताजनक है। नगा उग्रवादियों की रणनीति घात लगा कर हमले करने की रही है, ताकि अधिक से अधिक संख...

बाबाओं ने डिगाई आस्था

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। गुरमीत राम रहीम और आसाराम को सजा होने के बाद संदेश यही गया था कि अब धर्म और आस्था के नाम पर कोई भी बाबा छल-कपट करने से बचेगा, मगर ऐसा हुआ नहीं। ताजा मामला दाती महाराज (Dati Maharaj)से जुड़ा है। उन पर आश्रम की एक लड़की ने बलात्कार का आरोप लगाया है। संभव है कि उन पर लगे आरोप गलत साबित हो जाएं और वे बरी हो जाएं, मगर अभी जो आस्था संदेह के घेरे में आई है, उसका क्या किया जाए? अब इस दिशा में सोचना बेहद जरूरी हो गया है। हाल में शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज पर राजस्थान की एक 25 वर्षीय युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। युवती ने बाबा के तीन सौतेले भाइयों पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि यह सभी मेरे सिवाय कई लड़कियों से वर्षो से दुष्कर्म कर रहे थे। इससे पहले आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम के अलावा ऐसे कई प्रचलित नाम है जिन पर इस तरह के आरोप लग चुके है। अब सवाल यह उठता है जिन पर भक्त आंख मूंद कर भरोसा करते हैं और भगवान से जुड़ने का किसी धर्मगुरु के रूप में एक सुगम माध्यम ढूंढते हैं, वे भक्त अब क्या किसी और पर भरोसा दिखा पाएंगे। बाबाओं के प्रति एक तरह से नकारात्मक लहर ...

मन को सशक्त करने का माध्यम है योग

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। आज विश्व योग दिवस (International Yoga Day) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण जीवनचर्या योग को आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य लाभ के वैदिक सूत्र के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस किसी तरह के मतभेद अथवा भेदभाव के कारण उपजी अवधारणा नहीं। यह तो मात्र सार्वभौमिक कल्याण और विश्व शांति के लिए किया जाने वाला एक शुद्ध यज्ञ है। इसमें सभी को यत्नपूर्वक सम्मिलित होना चाहिए। World Yoga Day:  पिछले चार वर्षो के भारतीय शासन की उपलब्धियों में से एक अति महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय उपलब्धि है-अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन। इस वर्ष भारतीय संस्कृति एवं आयुर्वेद पद्धतियों तथा चारों वेदों में केंद्रक स्वास्थ्य विचार के रूप में मानित योग विद्या’ यदि आज इस सदी के इस कालखंड में संपूर्ण विश्व में व्याप्त हो चुकी है, तो इसका श्रेय आदिकालीन भारतीय जीवन संहिता की महानता को जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण जीवनचर्या योग को आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य लाभ के वैदिक सूत्र के रूप में देखा जा...

भाजपा का एक और साहसिक फैसला

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी गठबंधन (BJP-PDP Alliance Ends)टूट गया है। अपनी आतंक विरोधी छवि खराब होने के बाद भाजपा ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया। यह फैसला साहसिक है। अब कश्मीर में केंद्र सरकार की आतंक विरोधी मुहिम तेज हो सकेगी। जम्मू-कश्मीर में मार्च-2015 में पीडीपी-भाजपा के बीच हुए बेमेल गठबंधन वाली सरकार आखिरकार गिर गई। भाजपा ने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है। जब से राज्य में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी सेना, पत्थरबाजों-आतंकियों और नीतियों के मोर्चे पर दोनों पार्टियों के मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे, लेकिन गठबंधन तोड़ने का फैसला भाजपा ने 40 महीने बाद लिया। वैसे, अचानक लिये गए इस फैसले के गंभीर मायने हैं। रमजान के आखिरी दिन जवान औरंगजेब और पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के बाद केंद्र सरकार आतंकियों के खिलाफ सीजफायर को लेकर बैकफुट पर आ गई थी। पिछले चार साल में कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई इस एक महीने में धुलने लगी थी। बहरहाल, अगर भाजपा और पीडीपी के अलग होने के कारणों की समीक्षा करें, तो ब...