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Sooryavanshi Posters: अक्षय कुमार की फिल्म ‘सूर्यवंशी’ का फर्स्ट लुक जारी

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राज एक्सप्रेस। बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म ‘सूर्यवंशी’ (Sooryavanshi Poster) का फर्स्ट लुक रिलीज कर दिया गया है। रोहित शेट्टी के निर्देशन में बन रही फिल्म सूर्यवंशी साल 2020 में ईद के मौके पर रिलीज होगी। बॉलीवुड फिल्म मेकर रोहित शेट्टी की सिंघम, सिंबा जैसी बेहतरीन फिल्मों की सफलता के बाद अब फैंस फिल्म सूर्यवंशी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आज इस फिल्म का पहला लुक सामने आ गया है। इस फिल्म में अक्षय कुमार का एक्शन देखने को मिलेगा। फिल्म के पहले लुक में खाकी वर्दी पहने अक्षय कुमार हाथ में गन लिए पूरे एक्शन में नजर आ रहे हैं। यह भी पढ़ें: पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों को अक्षय कुमार ने डोनेट किए 15 लाख फिल्म की शूटिंग मई 2019 में सूर्यवंशी फिल्म की शूटिंग मई 2019 में शुरु हो जाएगी। फिल्म में बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता अक्षय कुमार एटीएस चीफ की भूमिका निभाएंगे फिल्म में अक्षय कुमार के किरदार का नाम ‘वीर सूर्यवंशी’ होगा। फिलहाल फिल्म की एक्ट्रेस का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन कैटरीना कैफ और पूजा हेगड़े लिस्ट अफवाहों में हैं। सूर्यव...

एक कलाकार की स्मृति का बिकना

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हिंदी सिनेमा के महान शोमैन राज कपूर की सुनहरी स्मृतियों से जुड़ा आरके स्टूडियो ( RK Studio )अब बिकने जा रहा है। हिंदी सिनेमा की अनेक क्लासिक फिल्मों का गवाह रहे आरके स्टूडियो का बिकना कलाप्रेमियों के लिए बड़े झटके के समान है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कपूर परिवार अपने फैसले से पीछे हटेगा। वैसे, महाराष्ट्र सरकार इस स्टूडियो का अधिग्रहण कर राजकपूर की अनमोल यादों को बचाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकती है। हिंदी सिनेमा के महान शोमैन राज कपूर की सुनहरी स्मृतियों से जुड़ा आरके स्टूडियो अब बिकने जा रहा है। हिंदी सिनेमा की अनेक क्लासिक फिल्मों का गवाह एवं आदर्श रहे आरके स्टूडियो का बिकना कलाप्रेमियों के मन को भा नहीं रहा है। पर इसके बिकने की खबर कोई अफवाह न होकर एक हकीकत है। दरअसल राजकपूर के मंझले पुत्र और मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर ने स्वयं यह जानकारी देते हुए कहा है कि ‘हमारे पिता का सपना अब परिवार के लिए सफेद हाथी बन गया है। इससे हमारी यादें जरूर जुड़ी है, लेकिन परिवार में झगड़े का कारण बने, इससे पहले ही हमने इसे बेचने का फैसला ले लिया है।’ यह स्टूडियो मुंबई के चेंबूर इलाके में दो एकड़ में फ...

अब खत्म हो लोकपाल का इंतजार

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राज एक्सप्रेस भोपाल। लोकपाल (Lokpal Bill)की नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को समयबद्ध प्रगति की जानकारी 10 दिन के भीतर शपथ-पत्र के जरिए देने को कहा है। लोकपाल की नियुक्ति का रास्ता साफ  कर न्यायालय ने लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में बड़ा काम किया है। अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जो काम चार साल से अटका पड़ा है, उसे पूरा करे और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार की जो मंशा है, उसे भी पूरा करे। लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को समयबद्ध प्रगति की जानकारी 10 दिन के भीतर शपथ-पत्र के जरिए देने को कहा है। दरअसल साढ़े चार साल पहले लोकपाल कानून बन जाने के बावजूद भी लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। नियुक्ति न हो पाने की पृष्ठभूमि में वर्तमान लोकसभा में विपक्ष के नेता के नहीं होने का तर्क सरकार अदालत को दे रही है। लोकपाल नियुक्ति की जो प्रक्रिया है, उसमें विपक्ष के नेता को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया जाना है। दरअसल 2014 के आम चुनाव के बाद लोकसभा का जो गणित बना है, उसमें किसी भी दल के पास विपक्षी दल की हैसियत नहीं है। विपक्षी द...

अब विवाद छोड़ें एलजी व सीएम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने दिल्ली के बॉस पर फैसला सुनाते हुए केजरीवाल और एलजी (LG Vs Delhi Government)दोनों को उनके अधिकारों की याद दिलाई है। अब जबकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली का बॉस कोई नहीं है, तो प्रतिष्ठा का लड़ाई पीछे छोड़ काम पर ध्यान हो। दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच 2015 से ही चली आ रही अधिकारों की जंग को लेकर आज देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से उलट सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपराज्यपाल दिल्ली में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, एलजी को भी कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा। सरकार बनाम उपराज्यपाल के बीच विवाद जगजाहिर है। हर मामले में दिल्ली सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमला करती रही है। हाईकोर्ट ने अगस्त 2016 में दिए फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि दिल्ली देश की राजधानी है और केंद्र शासित होने के चलते उपराज्यपाल ही दिल्ली के बॉस हैं। उनकी अनुमति जरूरी है। इस फैसले के बाद अधिकांश मामले में दिल्ली सरकार के पर कट गए और उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के बीच विवाद ...

बुराड़ी: तंत्र-मंत्र या फिर षडयंत्र

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। देश की राजधानी दिल्ली स्थित बुराड़ी (Burari Case)के संतनगर में एक ही परिवार के 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या की थ्योरी अब उलझती जा रही है। घर से मिले रजिस्टर के आधार पर पुलिस इस घटना को तंत्र-मंत्र से जोड़कर देख रही है, तो परिवार वाले इस घटना के पीछे षडयंत्र का दावा कर रहे हैं। जो भी हो, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। मगर अभी तो यह घटना हम सभी के लिए एक सबक बनकर आई है, जो तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास के खिलाफ सभी को जागृत करती है। देश की राजधानी दिल्ली स्थित बुराड़ी (Burari) के संतनगर में गत दिनों एक ही परिवार के 11 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का जो घरेलू मंजर सामने आया था, उससे हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल दहल गया कि आखिर यह क्या हो गया? अमूमन, अपराध की भी राजधानी समझी जाने वाली दिल्ली में अब यह कौन सी नई शातिर परंपरा शुरू हो गई कि चाह कर भी दिल्ली पुलिस के लंबे हाथ उस शातिर व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएंगे जो इस घटना का असली मास्टर माइंड होगा। हालांकि, रोज बदल रहे घटनाक्रम में कभी पुलिस की थ्योरी सामूहिक सुसाइड तो कभी किसी तांत्रिक बाबा की ओर घ...

बुराड़ी की घटना के मायने बेहद गंभीर

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। देश में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं यह बुराड़ी की घटना (Burari Case)से एक बार साबित हो गया है। इसी तरह का एक मामला कुछ वर्षों पहले राजस्थान में सामने आया था। सवाल है कि आखिर हम सही-गलत की पहचान को लेकर आज तक दुविधा में क्यों फंसे हुए हैं? राष्ट्रीय राजधानी या देश के किसी और हिस्से में आत्महत्या की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। मगर एक ही परिवार के 11 सदस्यों की आत्महत्या ने पूरे देश को जरूर सकते में डाल दिया है। संत नगर के बुराड़ी में हुई इस सामूहिक आत्महत्या का केस इससे पहले शायद ही देखा गया हो। आम तौर पर आत्महत्या करने की वजह तनाव या पैसे की तंगी होती है। कई बार किसी बेहद करीबी शख्स की मौत या लंबी बीमारी से भी परेशान होकर लोग आत्महत्या कर लेते हैं। हालांकि, परिवार के 11 सदस्यों की आत्महत्या में अब तक मिली जांच में पता चला है कि परिवार ने शायद तंत्र-मंत्र के प्रभाव में आकर ऐसा कदम उठाया। इस मामले ने 29 सितंबर 2013 के उस मामले की याद ताजा कर दी है, जिसमें राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में तीन बच्चों समेत परिवार के सभी आठ लोगों ने होली से...

काला के संदेश को समझें हम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। हर फिल्म की बनावट पर अपने समय, काल और परिस्थितियों की छाप जरूर होती है लेकिन हाल ही में आई रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ (Rajinikanth Film Kaala) इससे आगे बढ़कर अपना सांस्कृतिक प्रतिरोध दर्ज कराती है, यह अपनी बुनावट में सदियों से अपना वर्चस्व जमाये बैठे ब्राह्मणवादी संस्कृति की जगह दलित बहुजन संस्कृति को पेश करती है और पहली बार मुख्यधारा की कोई फिल्म बहुजनों के आत्मा की बात करती है। यह फिल्म जो संदेश देना चाह रही है, उसे आत्मसात करना ही होगा। ‘पुरोहितों ने पुराणों की प्रशंसा लिखी है। कम्युनिस्टों और विवेकवादी कई लेखकों ने इन पुराणों की टीकायें लिखी हैं, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा कि हमारी भी कोई आत्मा है जिसके बारे में बात करने की जरूरत है।’ (कांचा इलैया की किताब “मैं हिन्दू क्यों नहीं हूं से) फिल्में मुख्य रूप से मनोरंजन के लिए बनायी जाती हैं लेकिन सांस्कृतिक वर्चस्व को बनाए रखने में फिल्मों की भी भूमिका से इनकार नही किया जा सकता है। हर फिल्म की बनावट पर अपने समय, काल और परिस्थितियों की छाप जरूर होती है लेकिन हाल ही में आई रजनीकांत की फिल्म ‘काला’ इससे आगे बढ...

पानी को लेकर गंभीर हों हम

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में करीब साठ करोड़ लोग पानी की घोर कमी (Heavy Water Crisis)का सामना कर रहे हैं। 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि दस-बारह साल बाद क्या होगा। इसरो के पूर्व अध्यक्ष के.कस्तूरीरंगन का कहना है कि भारत के जल(water) उपयोग में कृषि-कार्यो में होने वाले इसके इस्तेमाल को पचास फीसद से नीचे लाने की जरूरत है। साथ ही, जल की एक-एक बूंद को बचाने और उसके प्रबंधन की कोशिश की जानी चाहिए। कस्तूरीरंगन का यह आग्रह दरअसल वक्त का तकाजा है। भारत में जल संकट दिनोंदिन और गहराता जा रहा है। पिछले दिनों आई नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में करीब साठ करोड़ लोग पानी की घोर कमी का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है। ऐसे में, अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले दस-बारह साल बाद कैसे भयावह हालात होंगे। अगला विश्वयुद्ध पानी के लिए होने की कथित भविष्यवाणी सही हो या नहीं, यह अभी से दिख रहा है ...

चीन को भारत का कड़ा जवाब

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। भारत और पाक के साथ त्रिपक्षीय वार्ता (India Pakistan China Trilateral Summit)का जो शिगूफा चीन ने फेंका है, उसे भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। यह सुझाव भारत में चीन के राजदूत ने दिया था। कुछ भी हो, इसके पीछे चीन की ही चाल है, क्योंकि अपने देश से इशारा मिले बिना राजदूत कुछ नहीं करते। भारत और पाक के साथ त्रिपक्षीय वार्ता का जो शिगूफा चीन ने फेंका है, उसे भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि यह सुझाव चीन सरकार की ओर नहीं आया था, बल्कि दिल्ली स्थित चीनी दूतावास में आयोजित एक सेमिनार में भारत में चीन के राजदूत ने रखा था। सेमिनार का विषय था कि वुहान के बाद बदले माहौल में भारत और चीन के रिश्ते कितनी तेजी से और कहां तक ले जाए जा सकते हैं। भारत सरकार ने इसे रत्ती-भर तवज्जो नहीं दी और इसे चीनी राजदूत की निजी राय करार दिया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह संभव है कि अपनी सरकार के इशारे के बगैर, चीनी राजदूत ऐसा सुझाव रखते? दरअसल, ऐसा कर चीन ने भारत का रुख भांपने की कोशिश की होगी कि मौजूदा दौर में भारत पर किस हद तक डोरे डाल कर अपने हित साधे जा सकते हैं। इसलिए ...

नगालैंड में फिर बढ़ रही अशांति

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। नगालैंड में सुरक्षा बलों पर किए जा रहे उग्रवादी हमले (Nagaland Militants Attack)बता रहे हैं कि राज्य में अशांति का दौर थमा नहीं है। उग्रवादियों ने गत 14 दिनों में तीन बार असम राइफल्स के जवानों को निशाना बनाया। यह हरकत उग्रवादियों के नगालैंड में फिर से सिर उठाने की परिचायक है। नगालैंड में सुरक्षा बलों पर उग्रवादी हमले बता रहे हैं कि राज्य में अशांति का दौर थमा नहीं है। उग्रवादियों ने पिछले 14 दिनों में तीन बार असम राइफल्स के जवानों को निशाना बनाया। रविवार को राज्य के मोन जिले में नगा उग्रवादियों के हमले में चार जवान शहीद हो गए। छह जून को भी इसी जिले में नगा उग्रवादियों ने असम राइफल्स के एक शिविर पर धावा बोला था। अभी 20 जून को उग्रवादियों ने फिर जवानों पर हमला किया। राहत की बात यह है कि इस बार वे अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। पिछले महीने की तीन तारीख को मोन जिले के चांगलांसू में नगा उग्रवादियों के हमले में असम राइफल्स के आठ जवान शहीद हो गए थे। हिंसा का यह सिलसिला चिंताजनक है। नगा उग्रवादियों की रणनीति घात लगा कर हमले करने की रही है, ताकि अधिक से अधिक संख...

बाबाओं ने डिगाई आस्था

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। गुरमीत राम रहीम और आसाराम को सजा होने के बाद संदेश यही गया था कि अब धर्म और आस्था के नाम पर कोई भी बाबा छल-कपट करने से बचेगा, मगर ऐसा हुआ नहीं। ताजा मामला दाती महाराज (Dati Maharaj)से जुड़ा है। उन पर आश्रम की एक लड़की ने बलात्कार का आरोप लगाया है। संभव है कि उन पर लगे आरोप गलत साबित हो जाएं और वे बरी हो जाएं, मगर अभी जो आस्था संदेह के घेरे में आई है, उसका क्या किया जाए? अब इस दिशा में सोचना बेहद जरूरी हो गया है। हाल में शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज पर राजस्थान की एक 25 वर्षीय युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। युवती ने बाबा के तीन सौतेले भाइयों पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि यह सभी मेरे सिवाय कई लड़कियों से वर्षो से दुष्कर्म कर रहे थे। इससे पहले आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम के अलावा ऐसे कई प्रचलित नाम है जिन पर इस तरह के आरोप लग चुके है। अब सवाल यह उठता है जिन पर भक्त आंख मूंद कर भरोसा करते हैं और भगवान से जुड़ने का किसी धर्मगुरु के रूप में एक सुगम माध्यम ढूंढते हैं, वे भक्त अब क्या किसी और पर भरोसा दिखा पाएंगे। बाबाओं के प्रति एक तरह से नकारात्मक लहर ...

मन को सशक्त करने का माध्यम है योग

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। आज विश्व योग दिवस (International Yoga Day) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण जीवनचर्या योग को आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य लाभ के वैदिक सूत्र के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस किसी तरह के मतभेद अथवा भेदभाव के कारण उपजी अवधारणा नहीं। यह तो मात्र सार्वभौमिक कल्याण और विश्व शांति के लिए किया जाने वाला एक शुद्ध यज्ञ है। इसमें सभी को यत्नपूर्वक सम्मिलित होना चाहिए। World Yoga Day:  पिछले चार वर्षो के भारतीय शासन की उपलब्धियों में से एक अति महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय उपलब्धि है-अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन। इस वर्ष भारतीय संस्कृति एवं आयुर्वेद पद्धतियों तथा चारों वेदों में केंद्रक स्वास्थ्य विचार के रूप में मानित योग विद्या’ यदि आज इस सदी के इस कालखंड में संपूर्ण विश्व में व्याप्त हो चुकी है, तो इसका श्रेय आदिकालीन भारतीय जीवन संहिता की महानता को जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण जीवनचर्या योग को आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य लाभ के वैदिक सूत्र के रूप में देखा जा...

भाजपा का एक और साहसिक फैसला

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी गठबंधन (BJP-PDP Alliance Ends)टूट गया है। अपनी आतंक विरोधी छवि खराब होने के बाद भाजपा ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया। यह फैसला साहसिक है। अब कश्मीर में केंद्र सरकार की आतंक विरोधी मुहिम तेज हो सकेगी। जम्मू-कश्मीर में मार्च-2015 में पीडीपी-भाजपा के बीच हुए बेमेल गठबंधन वाली सरकार आखिरकार गिर गई। भाजपा ने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है। जब से राज्य में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी सेना, पत्थरबाजों-आतंकियों और नीतियों के मोर्चे पर दोनों पार्टियों के मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे, लेकिन गठबंधन तोड़ने का फैसला भाजपा ने 40 महीने बाद लिया। वैसे, अचानक लिये गए इस फैसले के गंभीर मायने हैं। रमजान के आखिरी दिन जवान औरंगजेब और पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के बाद केंद्र सरकार आतंकियों के खिलाफ सीजफायर को लेकर बैकफुट पर आ गई थी। पिछले चार साल में कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई इस एक महीने में धुलने लगी थी। बहरहाल, अगर भाजपा और पीडीपी के अलग होने के कारणों की समीक्षा करें, तो ब...

अखिलेश से शर्मसार हुआ लोकतंत्र

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बंगले (Akhilesh Yadav Bungalow Controversy) में तोड़फोड़ का मामला रोज ही नई परतें खोल रहा है। लेकिन एक शानदार बंगले को जिस तरह लगभग खंडहर में तब्दील किया गया, वह गंभीर प्रश्न उठाता ही है। नेताओं के एक बड़े वर्ग के अंदर सभी सुख सुविधाओं से लैश जीवन आम बात हो रही है। यह पूरी राजनीति एवं भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की दृष्टि से चिंताजनक है। यह स्थिति राजनीति में बदलाव की मांग करती है। निश्चित रूप से यह देश के हर विवेकशील व्यक्ति के लिए कई मायनों में सन्न कर देने वाला वाकया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव का खाली किया गया बंगला जिस स्थिति में मिला है उसे खंडहर के सिवा कुछ कह ही नहीं सकते। एक शानदार बंगले को जिस तरह उन्होंने खाली करने के साथ नष्ट कर दिया वह कोई सामान्य खबर नहीं है। उसके बाद उनका यह बयान है कि सरकार सूची भिजवा दे हम वे सारे सामान वापस भिजवा देंगे। ऐसी ढिढाई के लिए कौन सा शब्द प्रयोग किया जाए यह तलाश करना मुश्किल है। यही नहीं पत्रकारों को बंगला दिखाने की व्यवस्था करने...

मप्र में बेटियों के हक में स्वर्णिम पहल

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राजएक्सप्रेस, भोपाल। आज के आधुनिक समाज में बेटियों और महिलाओं (Women in Society)को लेकर जिस तरह का उपेक्षित रवैया अख्तियार कर लिया गया है, वह ठीक नहीं है। मध्यप्रदेश समेत दूसरी सरकारें महिलाओं का जीवन स्तर सुधारने और उन्हें भयमुक्त माहौल देने के लिए तमाम योजनाएं चला रही हैं, मगर योजनाएं तब तक अपना काम नहीं कर पाएंगी, जब तक हम खुद को नहीं बदलेंगे। अत: जरूरी है कि समाज महिलाओं को लेकर अपनी सोच में बदलाव लाए और उनके रास्ते का पत्थर न बने। देश के साथ-साथ मध्यप्रदेश बदल रहा है। इस बात का गवाह है बीते 15 सालों का स्वर्णिम दौर। एक के बाद एक बेटियों की सुरक्षा और उनके बढ़ते रहने के लिए शिवराज सिंह सरकार ने जो कोशिश की है, उसका अनुसरण अब देश के दूसरे राज्य भी तेजी से कर रहे हैं। बेटियों के जन्म से लेकर उन्हें आर्थिक रूप से संबल बनाने तक की हर कोशिश मध्यप्रदेश में हुई है। बेटियों के दुष्कर्मियों को फांसी की सजा हो या फिर लाडली लक्ष्मी योजना की शुरुआत। इन कोशिशों का सुफल यह निकला कि बाल विवाह जैसी कुरीतियां कम होती जा रही हैं। यह मध्यप्रदेश के बदलाव का सबसे बड़ा सबूत है। इतिहास गवाह है कि ...